बरेली: जानवरों के आतंक से नहीं बचाव, जनवरी से अब तक 29311 हुए शिकार

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बरेली, अमृत विचार। लंबे समय से आवारा जानवर शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इनमें सिर्फ कुत्ते और बंदर ही शामिल नहीं हैं बल्कि बिल्लियों का भी आतंक कई माह से जारी है। इन जानवरों के काटने के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना जिला अस्पताल स्थित एआरवी सेंटर में …

बरेली, अमृत विचार। लंबे समय से आवारा जानवर शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इनमें सिर्फ कुत्ते और बंदर ही शामिल नहीं हैं बल्कि बिल्लियों का भी आतंक कई माह से जारी है। इन जानवरों के काटने के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना जिला अस्पताल स्थित एआरवी सेंटर में वैक्सीन लगवाने वाले मरीजों की भीड़ उमड़ रही है।

आंकड़ों के अनुसार बीते एक जनवरी से कुल 29311 लोगों को आवारा जानवरों ने काटा है, जो जिला अस्पताल में वैक्सीन लगवाने पहुंचे हैं, जबकि इस साल रैबीज से ग्रसित आठ मरीजों की जान जा चुकी है। जिला अस्पताल स्थित एआरवी सेंटर पर तीन माह में कुल 5464 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे हैं। सेंटर पर वैक्सीन की उपलब्धता बनी हुई है।

किस माह में पहुंचे कितने मरीज

  • माह – कुल मरीज – कुत्ता काटने के मामले – बंदर काटने के मामले – बिल्ली काटने के मामले – अन्य
  • जून – 1817 – 1493 – 61- 249 – 14
  • जुलाई – 1910 – 1542 – 93 – 262 – 13
  • अगस्त – 1737 – 1329 – 81 – 394 – 15

आंकड़े जनवरी से अब तक

  • 21473 लोगों को कुत्तों ने बनाया शिकार
  • 1353 लोगों को बिल्लियों ने काटा
  • 6086 लोगों को बंदरों ने काटा
  • 398 लोगों को अन्य जानवरों ने काटा

प्रतिदिन 150 मरीजों को लग रहा टीका
जिला अस्पताल के एआरवी केंद्र प्रभारी डा. सूरज पांडेय ने बताया कि केंद्र पर कुत्ते, बंदरों के साथ ही बिल्लियों के काटने के मामलों की संख्या बढ़ी है। प्रतिदिन 150 मरीजों को टीका लगाया जा रहा है। रोजाना वैक्सीन की 30 वायल की खपत हो रही है। एक वायल में पांच डोज होती हैं।

इन बातों का रखें ध्यान –

  • जानवर के काटने के बाद घाव को साबुन और बहते साफ पानी से तुरंत धोएं व स्प्रिट या फिर अल्कोहल से काटने वाले स्थान का साफ करें।
  • एंटी रैबीज क्लीनिक पर जाएं और डॉक्टर से परामर्श के अनुसार टीकाकरण का कोर्स पूरा करें।
  • घाव पर मिर्च, सरसों का तेल इत्यादि कोई अन्य पदार्थ न लगाएं और अंध विश्वास से बचें।
  • समय-समय पर पालतू जानवरों का टीकाकरण करवाएं।

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