बरेली: जिला अस्पताल में नहीं है निगेटिव ग्रुप का ब्लड

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बरेली, अमृत विचार। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में निगेटिव यूनिट का ब्लड नहीं है। इससे वहां पर आने वाले मरीजों का खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस की सक्रियता से दुनिया सहित देश पर कई प्रतिकूल प्रभाव हुए हैं, जिसका एक प्रभाव जिले में स्वास्थ्य महकमे के ब्लड बैंक पर …

बरेली, अमृत विचार। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में निगेटिव यूनिट का ब्लड नहीं है। इससे वहां पर आने वाले मरीजों का खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस की सक्रियता से दुनिया सहित देश पर कई प्रतिकूल प्रभाव हुए हैं, जिसका एक प्रभाव जिले में स्वास्थ्य महकमे के ब्लड बैंक पर भी दिख रहा हैं। प्रभाव इस कदर हैं कि ब्लड बैंक अपने ही अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों को ही ब्लड उपलब्ध कराने में असहाय हैं। मनुष्य के शरीर का महत्वपूर्ण ऊतक रक्त का निर्माण किसी प्रयोगशाला में असंभव हैं। किसी जरूरतमंद को रक्त प्रदान करने के लिए रक्तदान ही एक विकल्प होता हैं। कोरोना काल में रक्तदान शिविर न लगने के कारण रक्त की आपूर्ति नगण्य हैं।

जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक इन दिनों खून की कमी से जूझ रहे हैं, यूं कहें कि ब्लड बैंक भी एनिमिया के शिकार हो गए हैं। आलम यह हैं कि अगर किसी मरीज को ब्लड के निगेटिव चार ग्रुप में से कोई एक ब्लड ग्रुप चाहिए तो तीमारदारों को दूसरे अस्पतालों या फिर दूसरे जिलों में दौड़ लगाना पड़ सकती है।

जिला अस्पताल ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. यूवी सिंह का कहना है कि कोरोना की वजह से पिछले चार महीनों से गिने चुने लोग ही रक्तदान करने आ रहें हैं। मगर, अब स्थिति और भी खराब हो गई है। ब्लड बैंक में फिलहाल 36 यूनिट रक्त शेष हैं, जबकि ब्लड बैंक में 150 यूनिट से ज्यादा रक्त रखने की क्षमता हैं। आशंका जताई जा रही हैं कि विशेष परिस्थितियों में ज्यादा लोगों को रक्त की आवश्यकता पड़ गई तो तीमारदारों को भारी दिक्कत का सामना हो सकता हैं।

कारण स्पष्ट हैं कि कोरोना काल में अपनी इच्छा से रक्तदान करने वाले लोग यह महादान नहीं कर पा रहें हैं। लाकडाउन में छूट के बाद कुछ रक्तदाता ब्लड बैंक में आकर रक्तदान कर भी रहें हैं परंतु मांग व आपूर्ति के अनुपात में स्थिति बेहतर नहीं हैं। लिहाजा, लोगों से अपील की जा रही हैं कि वे बढ़-चढ़कर रक्तदान करें ताकि जरूरत पड़ने पर दूसरों की जान बचाई जा सके।

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