बरेली: नेताजी के जाने का सपा ही नहीं अन्य दलों को भी गम, सभी ने दुख व्यक्त कर अपनी प्रतिक्रिया की जाहिर

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बरेली, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव सपा ही नहीं अन्य पार्टियों के भी प्रिय थे। आज सुबह उन्होंने गुरूग्राम के मेदांता अस्पताल में 8.16 मिनट पर अंतिम सांस ली। इसकी पुष्टी पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट से की। ये भी पढ़ें- बरेली: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के …

बरेली, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव सपा ही नहीं अन्य पार्टियों के भी प्रिय थे। आज सुबह उन्होंने गुरूग्राम के मेदांता अस्पताल में 8.16 मिनट पर अंतिम सांस ली। इसकी पुष्टी पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट से की।

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उसके बाद प्रदेश ही नहीं देश में धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव की मृत्यू की खबर से शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री ने गहरा शोक व्यक्त किया। गृह मंत्री अमित शाह ने अस्पताल में जाकर उन्हें श्रदांजलि अर्पित की। मुलायम सिंह यादव के जाने से सपा को बड़ी क्षति हुई है। जिसकी पूर्ति होना असंभव है। जिले में उनकी मृत्यू पर लोगों ने अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया जाहिर की है।

आज समाजवादी पार्टी कार्यालय पर समाजवादी पार्टी के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव जी के स्वर्गवास के उपरांत एक शोक सभा हुई। जिसमें सभी ने मौन रखकर एवं नेता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की एवं नेताजी द्वारा किए हुए देश हित और प्रदेश की जनता के किसानों, नौजवानों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के हित में किए हुए कार्यों पर चर्चा हुई।

इस मौके पर मुख्य रूप से निवर्तमान जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी, भगवत शरण गंगवार, शहजिल इस्लाम, विजय पाल सिंह, डॉ आईएस तोमर, योगेश यादव, प्रो जाहिद खान, कदीर अहमद, जफर बेग, प्रमोद यादव, रविन्दर यादव, अनीस बेग, मनोहर पटेल, आदेश यादव गुड्डू, संजीव यादव, ओमपाल यादव, द्रोण कश्यप, मोहित भारद्वाज, सुजा खान, संजीव सक्सेना, रविंद्र श्रीवास्तव, भारती चौहान, तनवीर उल इस्लाम, नीरज तिवारी, गोविंद सैनी, सनी मिर्जा, मोहम्मद वसीम, वकार खान, अनुज आनंद, हैदर अली, अनमोल तिवारी, गजेंद्र पटेल, जितेंद्र श्रीवास्तव, सोनू कश्यप, विक्की कश्यप, मयंक शुक्ला मोंटी आदि लोग मौजूद रहे ।

कद के छोटे मुलायक सिंह ने लिए राजनीति में बड़े फैसले
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव कद में भले ही छोटे थे। मगर, वह हमेशा बड़े फैसले लेते थे। इसका एक उदाहरण ये भी है कि उन्होंने 4 अक्टूबर 1992 को अचानक पुराने दल को छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) बनाने की घोषणा कर सबको चौंका दिया था। उस वक्त यह देश का बड़ा फैसला था। इससे हर कोई हैरत में था। नई पार्टी की स्थापना के चार महीने बाद 1993 विधानसभा चुनाव में बसपा के गठबंधन से बहुमत हासिल कर चौंकाया। यूपी की 12वीं विधानसभा चुनाव में बरेली की 9 में से 7 सीट पर जीत दर्ज कर बसपा के सहयोग से सरकार बनाकर विरोधियों को हैरत में डाल दिया, और फिर दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गए थे।

नेताजी ने बरेली कैंट से विधायक प्रवीण सिंह ऐरन, फरीदपुर से सियाराम और कांवर (मीरगंज) से शराफत यार खां का टिकट काटकर सबको चौंका दिया था। 1996 में प्रवीण सिंह ऐरन की जगह अशफाक अहमद को, फरीदपुर में सियाराम की जगह भाजपा के नंदराम को टिकट दिया। इस चुनाव में अशफाक अहमद एमएलए और नंदराम चुनाव जीत गए, जबकि मीरगंज में विधायक शराफत यार खां की जगह सुल्तान बेग को मौका दिया गया। मगर, वह यह चुनाव हार गए थे। अगले विधानसभा चुनाव यानी 1996 के चुनाव में बरेली में सपा को 3 सीटें मिलीं। वह सात की बजाय मात्र तीन सीट पर ही सिमट गए। मगर, इस चुनाव में नवाबगंज सीट पर मास्टर छोटेलाल गंगवार ने भाजपा के भगवत शरण गंगवार को हराया था।

नेताजी मुलायम सिंह यादव ने 1996 के बाद 2002 के चुनाव में तीनों विधायक के टिकट काट दिए। इस चुनाव में नबावगंज में मास्टर छोटेलाल गंगवार से चुनाव हारने वाले भगवत शरण गंगवार को टिकट दिया। फरीदपुर में नंदराम से हारने वाले सियाराम सागर को और बरेली कैंट में अशफाक अहमद एमएलए की जगह उनके पोते शहजिल इस्लाम को समर्थन किया। यह तीनों ही चुनाव जीत गए।

इसके साथ ही मीरगंज में सुल्तान बेग और बहेड़ी में मंजूर अहमद भी चुनाव जीत गए। सपा को 1992 विधानसभा चुनाव में बरेली को नौ में से पांच सीट मिली थीं। सपा की स्थापना के बाद बरेली में 9 में 7 सीट पर जीत का परचम फहराया था। इस चुनाव में बरेली कैंट से प्रवीण सिंह ऐरन, फरीदपुर से सियाराम सागर, आंवला से महिपाल सिंह यादव, कांवर (मीरगंज) से शराफत यार खां, भोजीपुरा से हरीश कुमार गंगवार, बहेड़ी से मंजूर अहमद, सन्हा (बिथरी चैनपुर) से कुंवर सर्वराज सिंह विधायक बने थे।

आपातकानीन बंधुओं को दिलाया था लोकतंत्र सेनानियों का दर्जा
जून 1975 को देश की सत्ता पर काबिज रहने की गरज से लोकतंत्र की हत्या कर तानाशाही राज स्थापित करने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर विरोधी नेताओं को जेल की सलाखों मैं कैद कर दिया था। वर्ष 2006 में आपातकाल बंदियों को लोकतंत्र रक्षक सेनानी का नाम मान और सम्मान देने वाले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लोकतंत्र सेनानी वीरेंद्र कुमार अटल ने कहा कि स्वर्गीय यादव ने आपातकाल बंधुओं के हित में बहुत बड़ा काम किया था। जिसका देश के कई प्रदेशों ने अनुसरण किया। उत्तर प्रदेश के लोकतंत्र सेनानी उनके निधन से आहत हैं।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव चौधरी असलम मियां ने बताया मुलायम नाम के साथ ही दिल के भी मुलायम थे। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा है नेता जी सियासत में अपनी एक अलग पहचान रखते थे। उन्हें सियासत में अच्छे और बुरे की परख थी। काफी समय से बीमारी से जंग लड़ रहे थे। आज उन के निधन की खबर से मुझे बहुत दुख पहुंचा है। क्योंकि मुलायम सिंह यादव ने यूपी और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी जो हमेशा याद की जाएगी। मुलायम नाम के ही नही थे बल्कि दिल के भी मुलायम थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और घर वालों को सब्र दे।

गरीब-किसान की बुलन्द आवाज सदा के लिए हुई खामोश: अताउर्रहमान ने मुलायम के निधन पर जताया दुख, सैफाई रवाना
सपा विधायक और पूर्व मंत्री अताउर्रहमान ने सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अंतिम दर्शन को सैफाई रवाना होने से पहले अपने शोक संदेश मे अताउर्रहमान ने कहा है, कि गांव-ग़रीब-किसान की बुलन्द आवाज आज सदा के लिए खामोश हो गई ,यह दुखद समाचार हमें आज सुबह मिला जिससे मन बहुत व्यथित है। नेताजी जिसे अपना मान लेते थे, उसके लिये कुछ भी कर गुज़रने से गुरेज नहीं करते थे। उन्होंने न जाने कितने लोगों को राजनीति के निचले पायदान से उठाकर सत्ता के समकक्ष खड़ा कर दिया। मदद करते समय वह यह नहीं देखते थे कि सामने वाला किस धर्म, जाति या दल का है वह उसकी भरसक मदद करते थे।

बहेड़ी विधायक अताउर्रमान ने कहा, कि मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे नेता जी का हमेशा आशीर्वाद मिला, साथ ही मुझे उनकी कमेटी राष्ट्रीय सचिव होने का गौरव भी प्राप्त हुआ। वहीं उनके मुख्यमंत्री रहते हुए सरकार में राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर भी मिला, जहां मैंने पाया कि नेता जी का मिशन केवल सत्ता पाना न होकर सत्ता के ज़रिए जनता के लिये कुछ बेहतर करना, वंचितों के हितों की रक्षा करते हुये उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना रहा था। उनके निधन पर उन्हें खिराजे-अक़ीदत पेश करता हूं और परिवारीजनों को सब्र के लिये दुआ करता हूं।

पहले सदस्यता अभियान में किया था निर्वमान महानगर अध्यक्ष ने योगदान, नेता जी ने की थी प्रशंसा
4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद पहले सदस्यता अभियान में मुझे तत्कालीन समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष प्रोफ़ेसर जाहिद खा एवं उस समय कैंट विधानसभा के पूर्व विधायक पार्टी के नेता प्रवीण सिंह ऐरन द्वारा उन्हें पार्टी के अधिक सदस्य बनाने पर दोनों महानुभावों ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। जिसको लेकर मुलायम सिंह यादव ने इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की थी।

इस बारे में भाजपा महानगर अध्यक्ष डॉक्टर के एम अरोड़ा ने बताया प्रदेश ने बड़े नेता को खो दिया। उनके जाने से उत्तर प्रदेश को बड़ी क्षति हुई है। साथ ही उनके विपक्ष को भी बड़ा नुकसान हुआ है। नेता जी बढ़िया आदमी थे उन्होंने सदैव जनता के लिए संघर्ष किया। मै उनको श्रदा सुमन अर्पित करता हूं।

सोशल मीडिया पर रहा मुलायम सिंह यादव के शोक संदेश देने का माहौल
भाजपा के सबसे बड़े विपक्षी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री धरती पुत्र मुलायम सिंह के निधन पर सोशल मीडिया पर भी इसका असर देखने को मिला। पक्ष ही नहीं विपक्ष ने इस पर अपनी दुखद प्रक्रिया जाहिर कर शोक जताया।

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