अयोध्या: नगर पालिका के सीमा विस्तार में दायरा बढ़ा, वार्ड नहीं
रुदौली /अयोध्या, अमृत विचार। जिले की इकलौती आदर्श नगर पालिका परिषद रुदौली का सीमा विस्तार हुआ तो अब गांवों से लेकर मोहल्लों तक की पहचान भी बदल दी गई है। पालिका क्षेत्र का सीमा विस्तार तो किया गया है लेकिन वार्डों की संख्या पहले की तरही 25 ही रहेगी। वहीं रुदौली के वजीरगंज वार्ड में …
रुदौली /अयोध्या, अमृत विचार। जिले की इकलौती आदर्श नगर पालिका परिषद रुदौली का सीमा विस्तार हुआ तो अब गांवों से लेकर मोहल्लों तक की पहचान भी बदल दी गई है। पालिका क्षेत्र का सीमा विस्तार तो किया गया है लेकिन वार्डों की संख्या पहले की तरही 25 ही रहेगी। वहीं रुदौली के वजीरगंज वार्ड में जसमड़ को जोड़ते हुए बाबू कल्याण सिंह वार्ड नाम दिया गया है।
नगर पालिका का सीमा विस्तार किये जाने के बाद वार्डों के नाम महापुरष, स्वतंत्रता सेनानी और धार्मिक स्थलों पर रखे गये हैं। जैसे पूरे रसूलबक्स, पूरे शाहहुसैन व बहादुर बेग को अब महर्षि बाल्मीकि वार्ड के नाम से जाना जाएगा। ख्वाजाहाल, कजियाना, संजरी व पूरेखान का आंशिक भाग मिलाकर भगत सिंह वार्ड बना है। मोहल्ला पूरेखान को वीर अब्दुल हमीद वार्ड नाम मिला है। नपाप की सीमा में शामिल ग्राम खैरनपुर व लखमीपुर को मिलाकर राम वार्ड के नाम से गठन किया गया है। सरायपीर, गुलचप्पा, जहानपुर व भेलसर आंशिक की पहचान अब अवंती बाई लोधी वार्ड से होगी।
इसी तरह पुराना बाजार, टेढ़ी बाजार व आंशिक कटरा को श्रीहनुमान किला वार्ड बनाया गया है। मख्दूमजादा, पुरानाकोट को मखदूम साहब वार्ड, नयागंज, सराय हामिद व पूरे मलिक आंशिक को जोड़कर स्वामी दयानंद सरस्वती वार्ड, काशीपुर पूरे मियां आंशिक, मानपुर को काशीपुर वार्ड, भौली, खुसका, नेवाजपुर को गुलाब सिंह लोधी वार्ड और सेलूमऊ, चितईपुर, खलीलपुर व गोगावां मिलाकर कृष्णा नगर वार्ड बना है। सलेमपुर, मुहामिदपुर, शाहपुर व टीकर को मिलाकर संत रविदास नगर वार्ड तो जलालपुर को गुरू महाराज नंद नगर वार्ड बनाया गया है। इसकी पुष्टि उप जिलाधिकारी स्वप्निल यादव ने की है।
परिसीमन में वार्डों के नामकरण पर विरोध
रुदौली के पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी रुश्दी के खास माने जाने वाले नगर निवासी मसूद हयात गजाली ने वार्डों के गठन और वार्डों के नामकरण पर ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन में मनमानी तरीका अपनाया गया है। जिन वार्डों के नाम बदले गए हैं। इनका सैकड़ों साल का इतिहास है। गजाली ने कहा की अगर नाम बदलना ही था तो वैस करनी, मास्टर लतीफ उर्रहमान, हबीब उलहक, काजी अच्छे, गुरूदीन, देवीदीन जी, वसीम अंसारी के नाम पर करना चाहिए।
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