कर्म के बिना ईश्वर की कृपा असंभव :संतोष जी महाराज

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सुलतानपुर, अमृत विचार। शहर के बढ़ैयावीर स्थित श्री प्रेमचंद पार्क में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पूज्य संतोष जी महाराज ने कालिया मान मर्दन की कथा का उल्लेख किया। बताया कि समस्त राक्षसों का भगवान ने वध किया था, परंतु कालिया नाग का वध भगवान कृष्ण ने नहीं …

सुलतानपुर, अमृत विचार। शहर के बढ़ैयावीर स्थित श्री प्रेमचंद पार्क में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पूज्य संतोष जी महाराज ने कालिया मान मर्दन की कथा का उल्लेख किया। बताया कि समस्त राक्षसों का भगवान ने वध किया था, परंतु कालिया नाग का वध भगवान कृष्ण ने नहीं किया।

इस कथा की सामाजिक जनजीवन से युक्त विवेचना करते हुए महाराज जी ने बताया कि कृष्ण साक्षात ईश्वर हैं। यमुना महारानी भगवान की भक्ति हैं और कालिया नाग पाखंड का प्रतीक है। जब भगवान के भक्ति के क्षेत्र में पाखंड आ जाता है तो भगवान को बड़ी पीड़ा होती है। तब भगवान भक्ति के क्षेत्र में प्रवेश करके पाखंड को दूर भगा देते हैं, क्योंकि पाखंड हर जगह भले ही रह जाए अगर भक्ति के क्षेत्र में भगवान के भक्तों के जीवन में पाखंड आ जाता है तो संपूर्ण भक्ति का क्षेत्र विषाक्त हो जाता है।

संतोष जी महाराज ने भगवान की गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए सुनाया कि भगवान अकेले गोवर्धन पहाड़ को उठा रखे थे, फिर भी ग्वाल बालों से साथ-साथ लाठी लगाने के लिए कहा। कर्म के बिना भगवान की कृपा नहीं होती है। भगवान का कार्य तो स्वयं पूरा हो जाता है, लेकिन जो भगवान के कार्य में अपना भी श्रम नियोजित करते हैं उनका जीवन इतिहास के पन्नों पर अमर हो जाता है। इस अवसर पर डॉ जेपी सिंह, बृजेंद्र शर्मा, विकास राय, आचार्य नित्यानंद, दीपक पांडेय, राजेंद्र प्रसाद, नागेंद्र पांडेय, माता प्रसाद तिवारी, विश्वनाथ तिवारी व अन्य रहे।

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