जलालाबाद सीएचसी दे रही कोरोना को दावत, खुले में फेंकी जा रही पीपीई किट
जलालाबाद। कोरोनाकाल की विपदा से देश ही नहीं वरन समूचा विश्व संकटग्रस्त हो चुका है इससे निपटने को अब तक कोई दवा नहीं बनी है और न ही इसकी रफ्तार पर लगाम लगाई जा सकी है। पूरे विश्व मे इसके संक्रमण को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए। लेकिन उन निर्देशों का जलालाबाद …
जलालाबाद। कोरोनाकाल की विपदा से देश ही नहीं वरन समूचा विश्व संकटग्रस्त हो चुका है इससे निपटने को अब तक कोई दवा नहीं बनी है और न ही इसकी रफ्तार पर लगाम लगाई जा सकी है। पूरे विश्व मे इसके संक्रमण को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए।
लेकिन उन निर्देशों का जलालाबाद सीएचसी पर शायद कोई असर नही पड़ता। जिस कारण यहां कोरोना टेस्ट के बाद प्रयोग की गई पीपीई किट को यूंही खुले आसमान के नीचे रखे ओपन डस्टबिन में फेंक दिया गया है। कुछ पीपीई किट डस्टबिन के आस-पास जमीन पर भी पड़ी है।
आपको बता दें कि जलालाबाद में अब तक पांच कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं जिनमे तीन अभी भी सक्रिय हैं जबकि दो इलाज के बाद ठीक हो चुके है। सबसे बड़ी बात यह कि तीन सक्रिय मरीजों में दो मरीज जलालाबाद सीएचसी के स्वास्थ्यकर्मी हैं। उसके बावजूद सीएचसी स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संकट को लेकर गम्भीर नहीं है।
चाहे संक्रमित महिला स्वास्थ्यकर्मी को अस्पताल पहुँचाने में की गई 12 घण्टे की देरी का मामला हो या उसी महिला के साथ रहने वाले लोगों को होम क्वारन्टीन कर उनका कोरोना टेस्ट कराने का मामला हो सभी मे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही देखने को मिली है। जिसका खामियाजा यहां के लोगों को उठाना पड़ सकता है।
मुद्दा वाकई गम्भीर है मैने हाल ही में प्रभार ग्रहण किया है जिस कारण मेरा अब तक कई प्रयासों के बाद भी बायोमेडिकल वेस्टेज वालों से कोई सम्पर्क नहीं हो पाया है। इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही की जाएगी। मामले की पूरी जांच के बाद सम्बंधित पर कार्रवाई की जाएगी। -ओमेंद्र राठौर, चिकित्साधीक्षक, सीएचसी जलालाबाद
मामला संज्ञान में नहीं है तहसीलदार को जांच कर रिपोर्ट तलब की गई है। जांचोपरांत दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -सौरभ भट्ट, एसडीएम, जलालाबाद
कैसे हो पीपीई किट का सुरक्षित निपटान
कोरोना एक वायरस जनित बीमारी है जो केवल संक्रमित व्यक्ति या उसके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं को स्पर्श करने मात्र से फैल सकता है। कोरोना टेस्ट करते समय स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (व्यक्तिगत सुरक्षा कवच) का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे किसी भी तरीके से स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित व्यक्ति से प्रत्यक्ष सम्पर्क में न आ सके। दिन भर की टेस्टिंग के बाद इन किटों को बायोमेडिकल वेस्ट की तरह इस तरह निपटान किया जाता है कि किसी भी तरह यह किसी भी व्यक्ति या खुली हवा के सम्पर्क में न आ सके क्योंकि इसके सम्पर्क में आने से संक्रमण का खतरा बना रहता है।
