अयोध्या : तुलसी जन्मस्थान को लेकर दीर्घकालिक विमर्श हो : सिंह

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अमृत विचार, अयोध्या। सुल्तानपुर के सरिता लोकसेवा संस्थान के तत्त्वावधान में रविवार को यहां प्रेस क्लब सभागार में 22 वां अखिल भारतीय सम्मान-समारोह हुआ। जिसमें अयोध्या के साहित्य मनीषी डा रामानंद शुक्ल को साहित्य रत्नाकर सम्मान से नवाजा गया। वहीं गोण्डा और कानपुर के वरिष्ठ साहित्यकार भी सम्मानित किए गए। समारोह के प्रथम सत्र में …

अमृत विचार, अयोध्या। सुल्तानपुर के सरिता लोकसेवा संस्थान के तत्त्वावधान में रविवार को यहां प्रेस क्लब सभागार में 22 वां अखिल भारतीय सम्मान-समारोह हुआ। जिसमें अयोध्या के साहित्य मनीषी डा रामानंद शुक्ल को साहित्य रत्नाकर सम्मान से नवाजा गया। वहीं गोण्डा और कानपुर के वरिष्ठ साहित्यकार भी सम्मानित किए गए।

समारोह के प्रथम सत्र में तुलसी-जन्मभूमि कथ्य एवं तथ्य विषय पर संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ विद्याविन्दु सिंह ने कहा कि तुलसी के जन्मस्थान को लेकर शोध और साक्ष्य एकत्रित करके एक लम्बा दीर्घकालिक विमर्श होना चाहिए।विशिष्ट अतिथि डॉ महेन्द्रप्रताप सिंह और डॉ शम्भुनाथ त्रिपाठी ने भी तुलसी की जन्मभूमि पर तर्क और विचार प्रस्तुत किये। डा सूर्यपाल सिंह ने इस विषय पर गम्भीरता के साथ प्रकाश डाला।

डा रामानंद शुक्ल ने मन्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा तुलसीदास की जन्मभूमि को लेकर डॉ भगवदाचार्य और डॉ सूर्यप्रसाद दीक्षित ने भी बड़ा काम किया है। उन्होंने कहा कि गोण्डा के सूकर खेत पसका के राजापुर के दुबे परिवार का साबित करने का प्रयास किया है लेकिन प्रामाणिक सर्वमान्य निष्कर्ष निकालना बहुत कठिन है। इसके लिए अभी और अधिक श्रम की आवश्यकता है।

सभाध्यक्ष डॉ सभापति मिश्र ने बहुत ही वैदुष्यपूर्ण और प्रमाण के सहित वक्तव्य देकर तुलसी की जन्मभूमि को बांदा सिद्ध करने की पुरजोर वकालत की। वहीं संस्था ने डॉ सूर्यपाल सिंह को हिन्दी भूषण शिखर सम्मान और कानपुर के डॉ रामगोपाल पाण्डेय को कीर्ति भारती सम्मान प्रदान किया। विभिन्न प्रान्तों से पधारे विशिष्ट विद्वानों-साहित्यकारों को सम्मान प्रदान किए गये। कुछ लोगों को हिन्दी सौरभ तो कई को हिन्दी -रत्न से सम्मानित किया गया।

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