रामपुर: 46 साल बाद किसी भी सदन में नहीं गूंजेगी आजम खान की आवाज
रामपुर, अमृत विचार। पूर्व मंत्री आजम खान ने वर्ष 1976 से अपना सियासी सफर शुरू किया था इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस बीच उन्होंने तमाम उतार-चढ़ाव देखे लेकिन, सफर जारी रहा। एमपी-एमएलए कोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में तीन साल की सजा और छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जिसके चलते …
रामपुर, अमृत विचार। पूर्व मंत्री आजम खान ने वर्ष 1976 से अपना सियासी सफर शुरू किया था इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस बीच उन्होंने तमाम उतार-चढ़ाव देखे लेकिन, सफर जारी रहा। एमपी-एमएलए कोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में तीन साल की सजा और छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जिसके चलते आजम खान की विधायकी चली गई है और 46 साल में यह पहला मौका होगा जब आजम खां की आवाज किसी भी सदन में नहीं गूंजेगी।
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आजम खान सियासी सफर में दो बार विधायकी का चुनाव हारे हैं। वह अपना पहला चुनाव हार गए थे उसके बाद वर्ष 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी अफरोज अली खां से चुनाव हारने के बाद आजम खां को राज्यसभा में भेज दिया गया था। 46 साल के दौरान दस बार विधानसभा में एक बार राज्यसभा और एक बार लोकसभा में आजम की आवाज गूंजती रही। लेकिन, अब आजम खान की आवाज विधानसभा में नहीं गूंजेगी। लोकसभा चुनाव वर्ष 2019 में सपा-बसपा गठबंधन में आजम खान ने लड़ा था।
चुनाव के दौरान तहसील मिलक के ग्राम खाता नगरिया गांव में जनसभा के दौरान आजम खान ने तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को निशाने पर ले लिया था इस मामले में थाना मिलक में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में आजम खां को दोषी करार देते हुए आईपीसी की धारा 153-ए, 505ए और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में तीन साल की सजा और छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सजा के बाद आजम खां की विधायकी चली गई है।
जिसके चलते किसी भी सदन में आजम की आवाज नहीं गूंजेंगी। आजम खां ने सीतापुर जेल में बंद रहते वर्ष 2022 में हुआ विधानसभा चुनाव जीत लिया था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। आजम द्वारा लोकसभा सीट से इस्तीफा देने के बाद रामपुर में उप चुनाव हुआ था और भाजपा प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोधी ने आसानी से सपा प्रत्याशी को शिकस्त देकर संसद पहुंच गए थे।
आजम की तकरीरों के दीवाने थे लोग
सपा के फायर ब्रांड नेता आजम खान की तकरीरों के लोग दीवाने थे। अपनी तकरीरों के जरिए ही आजम ने दस बार विधानसभा का सफर तय किया और एक बार लोकसभा पहुंचे। लेकिन, उन्हीं तकरीरों के जाल ने आजम को धरातल पर ला दिया था। आजम खां की कोई भी तकरीर नवाबों को निशाने पर लिए बिना पूरी नहीं होती थी। उसी तर्ज पर उन्होंने उस समय रामपुर के जिलाधिकारी और फिलवक्त मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेना शुरू कर दिया था। अपनी तकरीरों के कारण ही आजम खान का साम्राज्य धड़ाम होता जा रहा है।
कलेक्टर-फलक्टर से मत डरियो…
2019 के लोक सभा चुनाव के दौरान आजम खान ने प्रचार के दौरान एक बार कलेक्टर से जूते साफ कराने की भी बात कही, तब उन्होंने कहा- ‘कलेक्टर फलक्टर से डरियो मत ये तनखैय्या हैं.. तनखैय्यों से नहीं डरते हैं। देखा है मायावती जी के फोटो कैसे बड़े बड़े अफसर रूमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं। हां उन्हीं की पार्टी से गठबंधन है हमारा। उनके जूते साफ कराउंगा उनसे अल्लाह ने चाहा तो..। यह वायरल वीडियो पहले भी खूब चर्चा में रहा लेकिन एक बार फिर आजम खां की यह वीडियो और कलेक्टर किस मां की कोख से पैदा किया…। जिस मामले में तीन साल की सजा हुई है, दोनों वीडियो इनदिनों खूब वायरल हो रहे हैं।
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