Kanpur में हवा संतुलित होने के बाद भी नहीं टला खतरा, AQI पहुंचा 182, उड़ती धूल से बीमार हो रहे लोग
कानपुर में एक्यूआई 182 तो पहुंच गया है, लेकिन खतरा अभी भी टला नहीं है। सड़कों से उड़ती धूल से लोग बीमार हो रहे है। साथ ही काले धुएं पर भी कोई नियंत्रण नहीं हो सका है।
कानपुर, अमृत विचार। शहर की हवा संतुलित हुई है। यानि दूषित कणों की कमी होने से प्रदूषण में कुछ सुधार हुआ है। लेकिन, जो स्थिति है उससे दोबारा खराब स्थिति को लेकर खतरा अभी टला नहीं है। जो एक्यूआई रिकार्ड किया गया है, वह खराब स्थिति से कुछ ही नीचे है। यानि शहर के पर्यावरण को सामान्य स्थिति में लाने के लिए विभागों को नींद से जागकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
शहर की सड़कों से लेकर वाहनों की हालत प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग कोई ठोस कार्रवाई करते नहीं दिखते। शहर झकरकटी बस अड्डे से लेकर कल्यानपुर, रावतपुर, घंटाघर से रामादेवी जाने वाली सड़क, जाजमऊ आदि सड़कों पर धूल उड़ना बंद नहीं हुई है। इन खस्ताहाल सड़कों पर जब वाहन दौड़ते हैं तो धूल से तस्वीर बेहद धुंधली हो जाती है।
वहीं सरकारी और निजी वाहनों से निकलने वाला धुआं भी पर्यावरण को हर रोज दूषित कर रहा है। लेकिन बावजूद इसके, न ही नगर निगम, लोनिवि, एनएच और न ही परिवहन विभाग इसको लेकर गंभीर नजर आ रहा है। लगातार प्रदूषण कभी खराब तो कभी बहुत खराब स्थिति में पहुंच रहा है। खुली हवा में सांस लेना, सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
खांसी, गले में इनफेक्शन और फेफड़े संबंधित बीमारियों से लोग परेशान हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को हो रही है तो वहीं प्रतिरोधक क्षमता की कमी वाले लोगों को बीमारी घेर ले रही हैं। इस कदर समस्याओं के बावजूद न ही परिवहन विभाग जागता दिख रहा है और न ही अन्य विभाग ही कोई ठोस कदम उठाते नजर आ रहे हैं।
मंगलवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो 182 एक्यूआई रिकार्ड किया है, वह प्रदूषण की स्थिति को संतुलित तो दिखा रहा है, लेकिन खराब स्थिति से वह कुछ ही कम है। जानकारों की माने तो अभी खास सुधार नहीं हुआ है। पर्यावरण को सामान्य स्थिति में लाना है तो विभागों को ठोस कार्रवाई करनी होगी।
राजधानी से बेहत हुई कानपुर की हवा
प्रदेश की औद्योगिक राजधानी की हवा प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बेहतर हुई है। काफी समय से कानपुर की हवा लखनऊ से भी ज्यादा खराब चल रही थी। प्रदूषण मामले में एक्यूआई ज्यादा रिकार्ड किया जा रहा था। मंगलवार को राजधानी की हवा खराब रिकार्ड की गई, जबकि कानपुर की हवा खराब से कम और संतुलित स्थिति में रही है।
आसपास के मंडल मुख्यालयों में एक्यूआई
मंडल एक्यूआई
लखनऊ 218
कानपुर 182
प्रयागराज 154
झांसी 130
आगरा 104
बरेली 104
70 फीसदी वाहन हवा में घोल रहे जहर
-शहर में दौड़ने वाले कुल वाहनों में 70 फीसदी से ज्यादा गाड़ियां हवा में जहर घोल रही हैं। करीब 16 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिसमें 70 फीसदी वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाण पत्र नहीं है। ऐसे में ये वाहन प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन करते माने जा रहे हैं। इनमें सरकारी वाहन भी शामिल हैं।
