विवाह पंचमी के दिन हुआ था राम-सीता का विवाह, लेकिन इस दिन नहीं होती शादियां

विवाह पंचमी के दिन हुआ था राम-सीता का विवाह, लेकिन इस दिन नहीं होती शादियां

मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था, इसलिए इस दिन को विवाह पंचमी के नाम से जाना जाता है।

Vivah Panchami: हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी मनाई जाती है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने माता सीता से विवाह रचाया था। इस साल विवाह पंचमी का त्योहार 28 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। ऐसे में लोगों को विवाह पंचमी का दिन शुभ लगता होगा और लोग सोचते होंगे कि इस दिन शादी-विवाह जैसे मंगल कार्य होते होंगे। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा लेकिन इस तिथि को पुराणों में अशुभ माना गया है और लोग इस दिन शादी नहीं करते हैं। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इस दिन लोग विवाह क्यों नहीं करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था, इसलिए इस दिन को विवाह पंचमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन को लोग भगवान राम और माता सीता के शादी के सालगिरह के तौर पर मनाते हैं। इस दिन लोग घरों में भगवान राम व माता सीता का विधि-विधान से पूजा करते हैं।

हिंदू धर्म में राम-सीता की जोड़ी को एक आदर्श पति-पत्नी में माना जाता है। लोग उनके आदर्शों के मिसाल देते हैं।  हर दम्पति चाहता है कि उनकी जोड़ी राम-सीता के समान हो। यहां तक कि बड़े-बुजुर्ग भी जोड़ों को यही आशीर्वाद देते हैं कि उनकी जोड़ी राम-सीता की तरह बनी रहे। इसके बावजूद इस तिथि को शादी करना अपशकुन माना जाता है। 

ऐसी मान्यता है कि इस दिन विवाह के बाद ही राम और सीता को 14 साल तक वनवास जाना पड़ा था और कई कष्ट उठाने पड़े थे। फिर रावण वध के बाद जब दोनों अयोध्या लौटे थे तो भगवान राम को माता सीता का परित्याग करना पड़ा था। इसी वजह से लोग इस तिथि को शादी करने से डरते हैं।

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