Chitrakoot : निष्पक्ष जांच हो तो सामने आ सकता है शौचालय घोटाला, ओडीएफ घोषित होने के बाद भी जिले की स्थिति दयनीय

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Edited By Amrit Vichar
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Chitrakoot News चित्रकूट में विश्व शौचालय दिवस पर शौचालयों की स्थिति के आकलन किया जाना समीचीन होगा। निष्पक्ष जांच होने पर शौचालय घोटाला सामने आ सकता है। ओडीएफ घोषित होने के बाद भी जिले की स्थिति दयनीय होगी।

चित्रकूट, अमृत विचार। Chitrakoot News आज विश्व शौचालय दिवस है। ऐसे दिवस निश्चित रूप से उन कामों और व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करने के लिए उचित अवसर होते हैं, जिनके नाम से इनको मनाया जाता है। विश्व शौचालय दिवस पर जिले में शौचालयों की स्थिति के आकलन किया जाना समीचीन होगा।

चित्रकूट जिला ओडीएफ (ओपन डिफेकेशन फ्री) यानी खुले में शौचमुक्त घोषित हो चुका है पर यहां के हाल बदतर हैं। ऐसा लगता है कि बिना जमीनी हकीकत परखे आननफानन में इस जिले को यह दर्जा दे दिया गया। गांव-कस्बों को तो छोड़िए हाइवे के किनारे ही सुबह सवेरे तमाम लोग लोटा लिए खेतों की ओर जाते नजर आ जाएंगे।

गांवों में शौचालयों की स्थिति बद से बदतर है। तमाम जगहों पर तो आरोप यह लगते हैं कि यहां शौचालय बने ही नहीं और कागजी कोरम पूरा कर लिया गया। जहां बने हैं, वहां कंडे और अन्य सामान रखा जा रहा है।

कर्वी ब्लाक में परसौंजा आदि गांवों में हालात खराब हैं और शौचालय के नाम पर क्या किया गया, समझ में आ जाता है। इसी तरह मानिकपुर विकास खंड के ददरी माफी, करका पड़रिया, छेरिहा, बराहमाफी, चूल्ही, गोपीपुर, करौंहा, जारो माफी, निही, खिचरी आदि तमाम गांवों में शौचालयों की हालत ठीक नहीं। दूसरे ब्लाकों में भी हालात बहुत अच्छे नहीं।

आरोप तो यहां तक हैं कि कई जगहों पर तो शौचालय बने ही नहीं और धन निकालकर बंदरबांट कर लिया गया। कई महिलाएं आरोप लगाती हैं कि प्रधान ने खाते में पैसा नहीं भेजा और कुछ सामान भेजकर गड्ढे में मिस्त्री के साथ खड़ाकर फोटो खिंचवा दी और धन हड़प लिया। कई तो इस मामले में धमकाने तक की बात कहती हैं। इन सभी आरोपों में सत्यता कितनी है, यह जांच में सामने आ सकता है। 

हलफनामा देकर की थी शिकायत

परसौंजा में शौचालय निर्माण में अनियमितता को लेकर रानी देवी, मनीषा देवी, सखिया, शोभा, रेखा देवी आदि महिलाओं ने हलफनामा देकर प्रशासन से शिकायत भी की। इनका कहना था कि 2016 से 2021 के बीच बने शौचालयों की सूची में इनका नाम है पर न तो कोई धनराशि प्राप्त हुई और न उनके यहां शौचालय बनाया गया। एक जानकारी के मुताबिक, आरटीआई में जानकारी सामने आई थी कि यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत 750 शौचालय बनाए गए हैं पर जमीनी हकीकत लगभग पांच सौ लोगों की है। लगभग दो सौ लोग तो बताते हैं कि उनको शौचालय मिला ही नहीं। इस संबंध में डीपीआरओ तुलसीराम बताते हैं कि उन्होंने टीम गठित कर दी है और जांच में जो दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ पंचायती राज अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

डीपीआरओ बोले, सवा लाख से ज्यादा बने शौचालय

जिला पंचायत राज अधिकारी तुलसीराम बताते हैं कि जिले के पांचों ब्लाकों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत 129455 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। उन्होंने इस बात से इंकार किया कि अब भी गांवों के लोग खेतों में शौच को जाते हैं। डीपीआरओ ने भी माना कि शौचालय निर्माण में अनियमितता की बातें सामने आई हैं। बताया कि जांच टीम बनाई गई है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। जिला स्वच्छता समिति के समन्वयकों, सचिवों और सफाईकर्मियों की टीम शौचालयों का सौ फीसदी सत्यापन करेगी।

पालिका के सार्वजनिक शौचालय भी बदतर

गांवों ही नहीं मुख्यालय के हालात भी बदतर हैं। नगरपालिका ईओ रामअचल कुरील बताते हैं कि नगर पालिका परिषद का सार्वजनिक टायलटों का पांच का लक्ष्य था और सभी निर्मित हो चुके हैं। कम्युनिटी टायलट परिक्रमा पथ, चित्रकूट धाम और कर्वी को मिलाकर 11 बनने थे। इनमें 10 बन चुके हैं और पोद्दार इंटर कालेज के पास एक निर्माणाधीन है। दावा किया कि प्रकाश, पानी और दिन में तीन बार सफाई के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। हालांकि मौके पर देखने पर भैरों पागा, मिशन रोड आदि जगहों पर बने शौचालयों की स्थिति देखकर इनके दावों का हकीकत पता चल जाती है।

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