श्रीमद्भागवत कथा : प्रेम के वशीभूत होकर छछिया भर छाछ के लिये नाच उठता अखिल ब्रह्मांड नायक
अमृत विचार, बांदा। जो परमात्मा अखिल ब्रह्मांड का नायक है वह गोपिकाओं के प्रेमवश छछिया भर छाछ के लिये नाच उठता है। यही भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम की पराकाष्ठा है। जीवन में काम करते रहिये, लेकिन प्रभु का चिंतन और दान अवश्य करते रहिये। यही साथ जायेगा।
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन की कथा सुनाते हुए कथा व्यास आचार्य विष्णु गोस्वामी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि अखिल ब्रह्मांड नायक श्रीहरि के पास किस वस्तु की कमी है, लेकिन यह भक्त और भगवान के अटूट प्रेम संबंधों की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है कि गोकुल में वे जब बाललीला करते हैं तो छछिया भर छाछ के लिये गोपिकाओं के एक इशारे पर नाच उठते हैं। खेल-खेल में ही श्रीकृष्ण ने बाल रूप में ही अनगिनत राक्षसों का वध कर गोकुलवासियों को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई।
मथुरा नरेश कंस को जब यह पता चला कि श्रीकृष्ण धरती पर अवतरित हो चुके हैं और गोकुल में हैं तो उसने श्रीकृष्ण को मारने के लिये पूतना नामक राक्षसी का सहारा लिया। वेश बदलकर पूतना नंद के घर पहुंची और बहाने से बालक श्रीकृष्ण को दूर ले जाकर अपनी गोद में लेकर विष भरे स्तनों से दुग्ध पान कराने लगी।
बालक श्रीकृष्ण वहां न पाकर सब व्याकुल हो गये। श्रीकृष्ण ने दूध के साथ ही मायावी पूतना के प्राण खींच लिये, लेकिन राक्षसी होने के बाद भी पूतना को सद्गति प्रदान की, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने उसका स्तनपान किया और स्तनपान अपने पुत्र को मां कराती है। कथा व्यास ने कहा कि जिंदगी जब तक रहेगी काम से फुर्सत मिलने वाली नहीं।
इसलिये परिवार चलाने के लिये काम करते रहिये और श्रीकृष्ण के नाम का सुमिरन के साथ ही अपने दोनों हाथों से दान करते रहिये। यही साथ जायेगा, बाकी सब यहीं धरा रह जायेगा। कथा में मुख्य यजमान मुन्नुलाल गुप्ता व राजदुलारी गुप्ता रहे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार(लालू दुबे), प्रशांत शर्मा,डॉक्टर गौड़ जी,संदीप बाजपेई, केपी सेन,शशि,आरव गुप्ता, किशन गुप्ता, संजय गुप्ता, रीता ओमर,शरद गुप्ता, कीर्ति गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
