बरेली: कॉमर्शियल वाहनों का दो माह का टैक्स माफ

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। बस ऑपरेटर और सरकार के बीच चल रही खींचतान के बीच सरकार ने अप्रैल और मई माह का टैक्स माफ कर दिया है। बावजूद इसके बस ऑपरेटर्स इसे लेकर नाखुश नजर आ रहे हैं। बस ऑपरेटर्स का कहना है कि सरकार बस संचालकों की मांग को गंभीरता से नहीं ले रही है। …

बरेली, अमृत विचार। बस ऑपरेटर और सरकार के बीच चल रही खींचतान के बीच सरकार ने अप्रैल और मई माह का टैक्स माफ कर दिया है। बावजूद इसके बस ऑपरेटर्स इसे लेकर नाखुश नजर आ रहे हैं। बस ऑपरेटर्स का कहना है कि सरकार बस संचालकों की मांग को गंभीरता से नहीं ले रही है। दो महीने का नहीं तीन महीने का टैक्स माफ किया जाना चाहिए। वहीं ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि ट्रकों का एक माह का टैक्स माफ कर सरकार दोहरी नीति अपना रही है।

मार्च माह में लाकडाउन लगने के बाद से बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। जिले से करीब 600 प्राइवेट बसों का संचालन किया जाता है। लाकडाउन के चलते बसें खड़ी हो गईं। इसे लेकर बस ऑपरेटरों ने सरकार से बसों का टैक्स माफ करने की मांग की थी। इसके बाद सरकार की ओर से बसों को सरेंडर करने के आदेश दिए गए। बस संचालकों ने आगामी महीनों के टैक्स में राहत के लिए बसों को सरेंडर करना शुरू कर दिया।

बस संचालकों ने लाकडाउन अवधि का टैक्स माफ करने के लिए फिर से मांग की तो अब शासन ने निजी बस संचालकों के लिए अप्रैल और मई माह के लिए टैक्स माफ कर दिया। जबकि ट्रक मालिकों को अप्रैल माह के टैक्स में राहत दी है। इसे लेकर बस ऑपरेटर्स नाखुश नजर आ रहे हैं।

“सरकार ने सिर्फ लॉलीपॉप थमाने का काम किया है। गुजरात जैसे प्रदेशों ने लाकडाउन का पूरा टैक्स माफ कर दिया, जिससे काफी हद तक बस ऑपरेटर्स की समस्या का समाधान हो जाएगा। यही हाल रहा तो स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी। भूख हड़ताल पर बस ऑपरेटर्स बैठने को मजबूर होंगे।” -सचिन ढींगरा, बस ऑपरेटर

“सरकार से ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की तरफ से लाकडाउन के तीन महीनों के टैक्स माफ किये जाने की मांग की गई थी लेकिन एक महीने की छूट दी गयी। यदि बस ऑपरेटर्स की तरह दो महीने का टैक्स आदि की छूट मिलती तो काफी हद तक सहूलियत मिल जाती। सरकार दोहरी नीति अपना रही है।” -मुन्ने, ट्रांसपोर्टर

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