अयोध्या: उत्तराखंड में बढा महंगाई भत्ता, यूपी में सुगबुगाहट, रोडवेज प्रबंधन ने मांगा बकाया एरियर का ब्यौरा

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार,अयोध्या। प्रदेश में जहां बस स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने तथा रूटों पर 75 फीसदी निजी बसों के संचालन की कवायद में रोडवेज कर्मियों को आक्रोशित कर रखा है। वहीं पड़ोसी प्रदेश उत्तराखंड कर्मियों का महंगाई भत्ता बढ़ने से यहां भी सुगबुगाहट तेज कर दी है। विभिन्न संगठन आस्तीन चढ़ाने में जुट गए हैं।

गौरतलब है कि इसी माह 16 नवंबर को उत्तराखंड परिवहन निगम के मुख्यालय यूसीएफ भवन दीप नगर रोड विष्णु विहार देहरादून से महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन का एक पत्र जारी हुआ है। जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष की ओर से 1 अक्टूबर 22 से महंगाई भत्ते की दर 34 फ़ीसदी अनुमन्य किए जाने के आदेश का उल्लेख है।

पत्र में कहा गया है कि जिनको सातवें वेतनमान के अनुसार पुनरीक्षित वेतनमान मिल रहा है उनका महंगाई भत्ता 1 अक्टूबर 2022 से 1 जनवरी 22 को अनुमन्य मूल वेतन के 31 फीसदी की विद्यमान दर से बढ़ाकर 34 फ़ीसदी की दर से प्रतिमाह भुगतान किया जाए। सोशल मीडिया के माध्यम से यह पत्र रोडवेज कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों तक पहुंचा तो सुगबुगाहट शुरू हो गई।

कर्मचारियों के फोन पदाधिकारियों को आने शुरू हो गए हैं जिसको लेकर कर्मचारी नेता तथा विभिन्न संगठनों पदाधिकारी आस्तीन चढ़ाने लगे हैं। माजरा भांप प्रदेश का परिवहन निगम भी डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गया है। परिवहन निगम मुख्यालय लखनऊ की ओर से क्षेत्रीय प्रबंधकों को पत्र भेजकर कार्मिकों का 30 सितंबर 22 तक लंबित देयताओं का विवरण उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया है।

जिससे आगामी दिवस में आयोजित होने वाली निदेशक मंडल की बैठक में लंबित देयताओं का मदवार एजेंडा प्रस्तुत किया जा सके। मुख्यालय के सहायक प्रबंधक बजट एसडी शर्मा ने अपनी इकाई के कार्मिकों के महंगाई भत्ते की लंबित देयता की सूचना प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने को कहा है।

रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय मंत्री राजेंद्र पांडेय का कहना है कि एक तरफ सरकार रामराज्य की बात कह रही है वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों का आर्थिक शोषण हो रहा है। प्रदेश में रोडवेज कर्मियों को केवल 17 फ़ीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है जबकि कुछ साल पूर्व अलग हुए पड़ोस के छोटे से प्रदेश उत्तराखंड में महंगाई भत्ता 34 फ़ीसदी कर दिया गया है। जल्द ही इसके समेत तमाम मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू होगा।

रोडवेज कर्मचारी परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि निजी करण के रास्ते पर चल रही सरकार सब कुछ बेचने पर आमादा है। राज्य कर्मियों को 38 फ़ीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है और रोडवेज कर्मियों का एरियर समेत अन्य बकाया है। निगम की हालत सुधारने के बजाय सरकार झुनझुना थमाने और बड़ी-बड़ी बातें करने में जुटी है।

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