अयोध्या: सरकारी अस्पतालों में फ्लॉप हुई आयुष्मान योजना, जानिये क्या है वजह
चार साल में सरकारी अस्पतालों में मात्र 4890 जबकि निजी अस्पतालों में 16887 लोगों का हुआ इलाज
अमृत विचार, अयोध्या। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं वाले जिलों में सबसे ऊपर रहने वाले अयोध्या में आयुष्मान योजना में सरकारी अस्पतालों की बेहद खराब स्थिति है। जिले में करीब 15 सरकारी अस्पतालों में योजना के चार साल बाद भी केवल 4890 मरीजों का ही इलाज हो सका है। जबकि 18 निजी अस्पतालों में योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या तीन गुनी 16887 है। आयुष्मान योजना के तहत लोगों को मुफ्त इलाज देने के एवज में सरकारी अस्पतालों को लगभग 1.47 करोड़ रुपये की धनराशि भी प्राप्त हो चुकी है। यह हाल तब है जब हर माह आयुष्मान समेत विभिन्न योजनाओं की प्रगति आला अधिकारियों की ओर से परखी जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में कुल 33 अस्पताल में अब तक 21757 लोगों ने आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ लिया है। डिस्ट्रिक प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. नीरज शर्मा ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत 30 नवंबर तक जनपद में 15 सरकारी अस्पतालों में 4890 व 18 निजी चिकित्सालयों में 16887 लोगों का मुफ्त इलाज हुआ है। डॉ. नीरज शर्मा ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत लोगों को मुफ्त इलाज करने के मामले में 15 सरकारी अस्पतालों को 28 नवंबर तक 1,46,58,787 रुपये की धनराशि भी प्राप्त हो चुकी है।
अब तक सिर्फ 62 फीसदी परिवार ही लाभान्वित
चार पहले शुरू हुई आयुष्मान योजना के तहत अब सिर्फ 62 फीसदी परिवारों को ही इस योजना का लाभ मिल सका है, जबकि 38 प्रतिशत परिवार इस योजना से लाभान्वित नहीं हो सके हैं। डिस्ट्रिक प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. नीरज शर्मा ने बताया कि 23 सितंबर 2018 से शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक जनपद में 62 फीसदी 2,49,274 परिवारों को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि 11,12, 659 लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया जा चुका है।
बोले जिम्मेदार
आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों को इलाज के लिए सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में सुविधाएं मिल रही हैं, हालांकि यह लाभार्थी की स्वेच्छा पर निर्भर करता है कि वह कहां इलाज कराता है। सरकारी अस्पतालों में इलाज की समुचित व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, मेरी सलाह है कि लोगों को सरकारी अस्पतालों में जाकर ही इलाज कराना चाहिए।
डॉ. दीपक पांडेय, नोडल अधिकारी, अयोध्या
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