अयोध्या: सिर से उठा मां-बाप का साया, अब सहारे की दरकार, 10 साल पहले हुई पिता की मौत, अब मां ने भी छोड़ दिया जिंदगी का साथ

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार अयोध्या। गरीबी और लाचारी का मतलब उस परिवार से पूछिए, जो महंगाई के इस दौर में मजदूरी कर अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई बच्चों को शिक्षित करने में लगाता है। ताकि उसके बच्चे इस अभिशाप से उबर सकें। संयोग देखिए! अब न उन बच्चों के पास मां-बाप का साया है, और न ही सिर ढंकने के लिए मुकम्मल छत। पढ़ाई तो दूर की बात है। ऐसे में बच्चों ने अपनी मूलभूत जरूरतों के साथ शिक्षा को अनवरत जारी रखने के लिए जनमानस और जिला प्रशासन से फरियाद की है। 
      मामला अयोध्या जनपद के साहबगंज स्थित लोनियाना मोहल्ले का है, जहां की रहने वाली कक्षा नौ की छात्रा नीलम वर्मा ने अपनी और अपने भाई के लिए मूलभूत सुविधाओं के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिये मदद की फरियाद की है। नीलम ने बताया कि वह कनौसा कॉन्वेंट स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रही है और उसका छोटा भाई अमित वर्मा घर से कुछ ही दूरी पर स्थित स्कूल में कक्षा आठ का छात्र है। उसका कहना है कि पिता की मृत्यु 10 साल पहले हो चुकी है। जिसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी मां के ऊपर आ गई। भाई-बहन की पढ़ाई के साथ घर की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उनकी मां घरों में झाड़ू-पोछा करती थीं। 17 दिसंबर को मां की मृत्यु होने के बाद अब वह बेसहारा हो गए हैं। हालांकि उनकी बड़ी मां लोगों के घरों में झाड़ू -पोछा कर दोनों बच्चों की देखभाल कर रही हैं। नीलम का कहना है कि मां-बाप का साया उठ जाने के बाद उन्हें अपनी जरूरतों और पढ़ाई के लिए फीस का इंतजाम करने के अलावा दो जून की रोटी, सिर ढंकने के लिये छत और शौचालय सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में बच्चों ने स्थानीय लोगों के अलावा जिला प्रशासन व सरकार से मदद की फरियाद की है। 

डॉक्टर बनना चाहती हैं नीलम
कनौसा कॉन्वेंट स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रहीं नीलम का कहना है कि वह डॉक्टर बनना चाहती हैं। उनके इस सपने को पूरा करने के लिए उनकी मां दिन-रात मेहनत करती थी। लेकिन अब मां की मृत्यु के बाद इस सपने को ग्रहण सा लग गया है। वह अपनी और अपने भाई की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, ताकि समाज के लिए कुछ कर सकें। उनका कहना है कि स्कूल की टीचर को परिस्थिति से अवगत कराया है। टीचर की तरफ से स्कूल प्रबंधन से बात कर इंटर तक उसकी फीस माफ कराने का आश्वासन मिला है

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