चिकित्सकीय पेशा मानव सेवा का मार्ग है, केजीएमयू का 18 वां दीक्षांत समारोह आयोजित, 41 मेधावियों को मिले मेडल
अमृत विचार लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 18 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मेडल एवं अवार्ड प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हौसला अफजाई भी की। उन्होंने मेधावियों से कहा, आपने जिस पेशे को चुना है वह कोई जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का मार्ग है।
अटल बिहारी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में संपन्न दीक्षांत समारोह में उपमुख्यमंत्री ने कहा, केजीएमयू के आप सब डाक्टर्स, नर्सेस के कार्यों की बदौलत ही हम सब का एवं उप्र का सम्मान बढ़ता है। स्टेनफोर्ड द्वारा प्रकाशित टॉप डाक्टर्स की सूची में राजधानी के 23 व उनमे 10 डॉक्टर केजीएमयू के होना गौरव की बात है। उन्होंने, लोगों से अंग दान हेतु जागरूक होने की अपील की| विशिष्ट अतिथि, राज्य मंत्री चिकित्सा शिक्षा उप्र, मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा, चिकित्सक के पास मरीज बेहद तनाव और दुखी होकर आता है और उसका विश्वास होता है कि आप ही उन्हें स्वस्थ कर सकते हैं। पास आउट डाक्टर्स को मरीजों से ज्यादा बात करके डाइग्नोस करने की सलाह दी।
माता-पिता असली गोल्ड मेडल हैं
कुलाधिपति एवं राज्यपाल, उप्र आनंदीबेन पटेल ने मेडल एवं अवार्ड प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुये कहा, माता-पिता को हमेशा याद रखें एवं आशीर्वाद प्राप्त करते रहें यही असली गोल्ड मेडल है। क्योंकि उन्होंने कड़ी मेहनत करके आप को इस योग्य बनाया है।
उन्होंने नैक आवश्यकताओं को बताया, आर्गन डोनेशन करके नया जीवन देने का आग्रह किया | कुलाधिपति ने होनहार बेटियों को बधाई दी व उनके उज्जवल भविष्य हेतु आशीर्वाद दिया | केजीएमयू कुलपति ले.जन.(डाॅ.) बिपिन पुरी ने चिकित्सा विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में प्रति कुलपति डॉ. विनीत शर्मा, डॉ. पुनीता मानिक, डॉ. ए के टिक्कू, डॉ.ए के त्रिपाठी, डॉ.अनिल निश्चल एवं कुलसचिव रेखा एस चौहान उपस्थित रहीं। संचालन प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ.अमिता पाण्डेय तथा डॉ.सौमेंद्र विक्रम सिंह ने किया ।
अंगदाता के परिजन हुए सम्मानित
दीक्षांत समारोह में मेधावियों के साथ ही ब्रेन डेड व्यक्तियों के अंगदान करने वाले छह परिवारों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही केजीएमयू में गठिया विभाग की स्थापना करने वाले डॉ.सिद्धार्थ दास को एमिनेंट फैकल्टी अवार्ड से नवाजा गया। इनके साथ डाॅक्ट्रेट आफ साइंस (डीएससी) की उपाधि ब्रिगेडियर डॉ. अनिल और डॉ. मोन जैदी को दिया गया। इस उपाधि को आनरिस कासा भी कहा जाता है।
