बरेली: डेढ़ करोड़ की बिजली चोरी, 10 लाख देकर छूट गए

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Edited By Amrit Vichar
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आसिफ अंसारी, बरेली, अमृत विचार। बदायूं रोड पर मेधांश अस्पताल में बिजली चोरी के मामले में पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने 1.53 करोड़ का जुर्माना तय किया था लेकिन सिर्फ दस लाख रुपये जमा कराकर मामला निपटा दिया। बिजली चोरी कराने का आरोपी जेई जरूर नहीं बच पाया। उसे निलंबित पहले ही कर दिया गया था। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय स्तर से उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी है।

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सुभाषनगर स्थित मेधांश अस्पताल में पिछले साल 80 किलोवाट के कनेक्शन पर बिजली चोरी होते हुए पकड़ी गई थी। एसडीओ महेंद्र सिंह और विजय कुमार कनौजिया के छापा मारने पर पता चला था कि ट्रांसफार्मर से सीधी केबल डालकर अस्पताल में बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद एक्सईएन प्रथम आरके पांडेय ने जांचकी ओर एक साल से इसे बिजली चोरी किए जाने का मामला मानते हुए मेधांश अस्पताल पर एक करोड़ 45 लाख आठ हजार रुपये राजस्व निर्धारण किया था। इसके साथ आठ लाख रुपये समन शुल्क तय किया गया था। इस तरह अस्पताल प्रबंधन को कुल मिलाकर 1.53 करोड़ रुपये की अदायगी पावर कॉरपोरेशन को करनी थी।

बिजली चोरी के इस मामले में सांठगांठ साबित होने पर सुभाषनगर के जेई मंजीत सिंह को निलंबित करने के साथ दो संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया था। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई और जांच के लिए दो अधिशासी अभियंताओं की कमेटी का गठन किया गया। उधर, अस्पताल प्रबंधन ने इसके बादअपने बचाव के लिए लखनऊ में चीफ इंजीनियर कॉमर्शियल के यहां आवेदन किया। इसमें उसने खुद को निर्दोष बताया। कुछ साक्ष्य भी पेश किए।

चीफ इंजीनियर कॉमर्शियल ने इन साक्ष्यों पर यकीन करते हुए इसे साल भर के बजाय सिर्फ पांच दिन से बिजली चोरी किए जाने का मामला मान लिया, लिहाजा जुर्माने की रकम डेढ़ करोड़ से घटाकर दस लाख कर दी गई। अस्पताल प्रबंधन के दस लाख रुपये जमा करने के बाद उसके खिलाफ मामला खत्म कर दिया गया। आरोपी जेई मंजीत सिंह के खिलाफ जांच करने के बाद रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है। अब मुख्यालय से ही जेई पर कार्रवाई होगी।

मेधांश अस्पताल में बिजली चोरी के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने लखनऊ में चीफ इंजीनियर कॉमर्शियल के समक्ष आवेदन किया था। मुख्यालय के आदेश पर ही जुर्माना घटाकर 10 लाख रुपये किया गया है। अस्पताल ने यह पैसा जमा कर दिया है। जेई पर कार्रवाई मुख्यालय स्तर से ही की जाएगी।- आरके पांडे, अधिशासी अभियंता प्रथम

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