बरेली: 'जीएसटी वसूलेंगे पर ग्राहकों को पक्का बिल नहीं देंगे'

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Published By Vishal Singh
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महिपाल गंगवार/बरेली,अमृत विचार। बीते दिनों मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेशभर में जीएसटी (राज्य कर) विभाग की टीमों ने टैक्स चोरी को लेकर प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की थी। तमाम जिलों में इस कार्रवाई का विरोध हुआ था। बरेली के व्यापारिक संगठन भी इसको लेकर लामबंद हो गए थे। कुछ समय बाद ही शासन ने इस पर रोक लगा दी थी, लेकिन टैक्स चोरी का खेल जिले में अब भी जारी है।

विभाग के आंकड़ों के अनुसार मंडल में मात्र 12 हजार व्यापारी ही जीएसटी में पंजीकृत हैं, जबकि कारोबार करने वालों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। किराना व्यापारी, हार्डवेयर, जनरल स्टोर्स, सर्राफा, लोहा, सीमेंट, कपड़ा, केमिस्ट, ऑटो पार्ट्स के ज्यादातर व्यापारी ग्राहकों से जीएसटी वसूल कर रहे हैं, लेकिन बिल नहीं देते, जबकि किसी भी वस्तु की खरीद पर ग्राहक को पक्की रसीद देना जरूरी है।

जिले में हजारों दुकानें ऐसी हैं, जिनका प्रतिदिन का व्यापार लगभग 50 हजार से लेकर लगभग 5 लाख रुपये तक है, लेकिन अधिकतर दुकानदार पर्ची पर खरीदी गई वस्तु का हिसाब-किताब कर पैसे लेते हैं। ज्यादा हुआ तो दुकान की बिल बुक छपवाकर बिना टिन नंबर के बिल ग्राहकों को थमा देते हैं। हालांकि, बड़े मॉल या दुकानों में बिल के साथ जीएसटी जुड़ा हुआ बिल दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार भी रखती है नजर
अफसरों के अनुसार जीएसटी के लागू होने के बाद सरकार ने प्रदेश के वाणिज्यकर और केंद्र के वस्तु एवं सेवा कर विभाग के बीच बेहतर तालमेल के लिए कार्यों का बंटवारा किया है, जिसके तहत डेढ़ करोड़ से अधिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों पर राज्य और केंद्र दोनों सरकारों की नजर रहती है। इससे कम, लेकिन 20 लाख से अधिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों में से 90 प्रतिशत पर राज्य व 10 प्रतिशत पर केंद्र सरकार नजर रखती है।

केस-1
कृष्णा नगर कालोनी के प्रवीन बताते हैं कि शाहमतंगज में किराना की दुकान से घर के लिए करीब साढ़े तीन हजार रुपये का सामान लिया। दुकानदार ने सादा कागज पर बिल बनाकर थमा दिया। दुकान पर कई अन्य ग्राहक भी खड़े थे। दुकानदार से जीएसटी बिल देने का कहा तो बोला कि अभी पंजीकरण नहीं है।

केस-2
कुआडांडा ब्लाक के गुरुलाल ने बताया कि रविवार को हिंद सिनेमा के पास ऑटो पार्ट्स की दुकान से कार का करीब करीब आठ हजार रुपये का समाना खरीदा। जब बिल देने की बात कही तो कागज पर सामान और उसकी धनराशि लिखकर दे दी। भुगतान ऑनलाइन खाते में किया।

केस-3
हरुनगला निवासी जीतू प्रजापति ने बताया कि वह ठेकेदार हैं। बीसलपुर रोड स्थित एक दुकान से सरिया और सीमेंट लिया। दोनों ही सामान का करीब 17 हजार रुपये का बिल बना, जो पर्ची पर बनाकर दे दिया। प्रिंटेड बिल नहीं दिया है। मांगने पर कहा गया कि जीएसटी बिल चाहिए तो खर्चा बढ़ जाएगा।

केस 4
सिकलापुर निवासी संदीप यादव ने बताया कि केमिस्ट की दुकान से कुतुबखाना में एक थोक विक्रेता के यहां से दवाइयां ली थीं। इस दौरान दुकानदार ने पूछा, क्या मेडिकल चलाते हो, मना करने पर दवा तो दे दी, लेकिन किसी प्रकार का बिल नहीं दिखा। कहा कि यह फुटकर दुकान नहीं। सिर्फ मेडिकल संचालकों को ही बिल दिए जाते हैं।

दो श्रेणी हैं, जिसमें 20 और 40 लाख रुपये के वार्षिक टर्न ओवर पर जीएसटी में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, अगर जीएसटी लेने के बाद व्यापारी पक्का बिल नहीं देता तो ग्राहक विभाग में इसकी शिकायत कर सकता है। इस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा। मामले में जुर्माने का भी प्रावधान है- वीडी शुक्ला, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1।

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