हिमालय से Kanpur की धरती पर आया दुर्लभ गिफेन गिद्ध, चिड़ियाघर में किया गया क्वारंटीन

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कानपुर के चिड़ियाघर में गिफेन गिद्ध क्वारंटीन किया।

हिमालय से कानपुर की धरती पर दुर्लभ गिफेन गिद्ध आ गया। इस पर लोगों ने चादर फैलाकर उसे पकड़ लिया। चिड़ियाघर में उसे क्वारंटीन किया गया।

कानपुर, अमृत विचार। प्रदेश के सबसे बड़े चिड़ियाघर में गिफेन प्रजाति का एक और गिद्ध पहुंच गया है। हिमालयों में पाया जाने वाला यह गिद्द शहर के ही ईदगाह कब्रिस्तान में लोगों को दिखा, जिसे लोगों ने ही चादर की मदद से रेस्क्यू किया और पुलिस को सौंप दिया। जिसके बाद यह चिड़ियाघर लाया गया। यहां उसे अस्पताल में निगरानी में रखा गया है।

करीब चार से पांच फीट लंबे पंख वाले इस गिद्ध की लंबाई भी डेढ़ से दो फीट है। यह 12 किलो वजन का स्वस्थ गिद्ध है। उम्र करीब 15 मानी जा रही है और पहले दिन इसने 800 ग्राम मीट खाकर सेहतमंद होने का प्रमाण भी दिया है। 
ईदगाह कब्रिस्तान में एक व्यक्ति को गिद्ध का जोड़ा दिखाई दिया।

दोनों गिद्ध आकार में विशाल दिख रहे थे, जिसे देख कोतुहल बन गया। क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि अचानक दोनों उड़ने लगे, जिसमें एक तो वहां से चला गया, लेकिन यह उड़ नहीं सका और गिरने लगा। तभी चादर की मदद से करीब आधा दर्जन लोगों ने गिद्ध को पकड़ा।

पुलिस को सूचित किया गया और फिर उनके हवाले कर दिया। एक वीडियो भी लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर डाला है, जिसमें गिद्ध ने पंख फैलाए हैं, लोग उसे छू रहे हैं। गिद्ध दिखने में ही काफी भयानक लग रहा है। उसकी गर्दन के नीचे काफी बाल हैं और पंख काफी बड़े हैं।

पुलिस ने गिद्द को चिड़ियाघर के हवाले कर दिया है। यहां उसे अभी अस्पताल में रखा गया है। उसको मीट दिया जा रहा है और सेहतमंद को लेकर संतुष्टी होने के बाद उसे दर्शकों के सामने लाने के लिए गिद्ध बाड़े में लाया जाएगा।

पर्यावरण के लिए बेहद लाभकारी हैं ये

गिफेन गिद्ध पर्यावरण के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। पशु चिकित्सक डॉ. नीतेश कटियार बताते हैं कि गिफेन गिद्ध बड़े आकार के होते हैं और एशिया के हिमालयों में पाए जाते हैं। ऊंचे हिमलय में रहने वाले इन गिद्धों का सिर सफेद होता है और एक बार में यह करीब 40 से 50 किमी तक की उड़ान भरते हैं। उसके बाद कहीं ठहरते हैं और फिर उड़कर नया ठिकाना चुनते हैं। ये सड़ा-गला मीट खाते हैं।

इस लिए ये पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर माने जाते हैं। क्योंकि जंगल या अन्य कहीं सड़ रहा मीटर इनका आहार बनता है तो फिर पर्यावरण को इससे काफी राहत मिलती है। इस आहार के भोग में उनके बड़े नाखून और लंबी पर नीचे की ओर झुकी नुकीली चोंच मदद करती है। ये 25 वर्ष तक जीते हैं।


एक महीने पहले भी चिड़ियाघर आया था गिद्ध

इटावा के लायन सफारी से एक महीने पहले भी इसी प्रजाति का गिद्ध कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। पशु चिकित्सक डॉ. नीतेश कटियार ने बताया कि लायन सफारी में 15 से 20 वर्ष उम्र का गिफेन प्रजाति का गिद्ध लायन सफारी से कानपुर लाया गया था, तब इस प्रजाति के गिद्धों की संख्या चार हो गई थी, अब पांच गिफेन गिद्द प्राणी उद्यान में हैं। इसके अलावा भारत का काले सिर वाला कोल गिद्ध सहित तीन प्रजाति के गिद्ध हैं।

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