बरेली: बैंक्वेट हाल संचालकों पर जीएसटी विभाग की नजर, छापे की तैयारी

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Edited By Amrit Vichar
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जिले में करीब 200 बैंक्वेट हाल होने का दावा, पंजीकरण कराने वालों की संख्या 10 फीसदी भी नहीं

बरेली, अमृत विचार। 20 लाख का सालाना कारोबार करने वाले बैंक्वेट/मैरिज हाल जीएसटी के दायरे में हैं और उन्हें जीएसटी चुकानी पड़ेगी, लेकिन जिले के अधिकांश बैंक्वेट हाल एवं मैरिज हाल जीएसटी नहीं चुका रहे हैं। जनपद में चलने वाले ऐसे कई बैंक्वेट हाल रडार पर हैं। जिनके यहां 20 लाख से अधिक का ट्रांजेक्शन होता है लेकिन न तो वह पंजीकरण करा रहे और न जीएसटी जमा कर रहे हैं।

विभाग ने इनको पंजीकरण की श्रेणी में लाने के लिए सूचनाएं एकत्रित कर जांच के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया है। यह भी पता लगा है कि कुछ संचालक, जिन्होंने पंजीकरण तो करा रखा है, वे नियमित तरीके से बिलिंग नहीं कर टैक्स चोरी भी कर रहे हैं। अफसरों के मुताबिक जनपद में करीब 220 से अधिक छोटे व बड़े मैरिज हाल हैं। इनमें जीएसटी विभाग में महज 10 फीसदी ने भी पंजीकरण नहीं कराया है।

जीएसटी में 20 लाख से अधिक का वार्षिक टर्न ओवर रखने वाले विवाह घर और होटल कारोबार पर 18 प्रतिशत सर्विस टैक्स है। इधर शासन की ओर से दिया गया वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1135.92 करोड़ का लक्ष्य को पूरा करना है। इस कारण विभाग पंजीयन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हर क्षेत्र के व्यवसाय पर अधिकारियों की नजर है। इसी के तहत अधिक से अधिक बैंक्वेट हाल को पंजीकरण के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अफसरों का दावा है लक्ष्य 90 फीसदी तक पूरा कर लिया गया है।

ऐसे होता है कर निर्धारण
उदाहरण के तौर पर एक विवाह घर का दो लाख रुपये किराया है, जिसमें विवाह स्थल के अलावा फूल माला, वीडियोग्राफी व सजावट भी शामिल है। साथ ही कैटरिंग (खानपान व्यवस्था) 8 लाख पर दी गई है। ऐसे में बैंक्वेट हाल संचालक को 10 लाख रुपये की राशि पर 18 प्रतिशत सर्विस टैक्स जमा करना होता है। संचालक को फूल माला, सजावट, वीडियोग्राफी और कैटर्स से टैक्स ले सकता है। बशर्ते, उनकी वार्षिक आय 20 लाख से अधिक हो। इसी तरह होटलों में प्लेट सिस्टम पर भी यही नियम लागू है। विभाग इसी हिसाब से ही कर निर्धारण करता है।

ज्यादातर रिसोर्ट वालों ने करा रखा पंजीकरण
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जीएसटी में पंजीकरण कराने वालों में रिसोर्ट अधिक शामिल हैं। बैंक्वेट हाल संचालक इक्का-दुक्का ही हैं। बीते साल पीलीभीत रोड स्थित एक बारात घर पहुंची जीएसटी की टीम ने कारोबारी से जुड़े अभिलेखों की जांच की थी। नियमानुसार यहां रिटर्न भरने समेत सभी अभिलेख ठीक मिले थे।

पंजीकरण पर जोर दिया जा रहा है। यह तो ठीक है, लेकिन जीएसटी में 20 लाख तक के कारोबार पर मिलने वाली छूट तय नहीं होती। किसी बैंक्वेट हाल संचालक ने पंजीकरण करा लिया तो उसको टैक्स देना ही है। 18 प्रतिशत का स्लैब कम कर पांच प्रतिशत करने की मांग की जा चुकी है। जीएसटी काउंसिल की बैठक के अलावा वित्तमंत्री और केंद्रीय मंत्री को पूर्व में मांग पत्र दिया गया, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया- गोपेश अग्रवाल, अध्यक्ष, बैंक्वेट हाल एसोसिएशन।

हर क्षेत्र के व्यवसाय पर विभाग की नजर है। जनपद में अधिकांश विवाह घरों ने पंजीकरण नहीं करा रखा है। इसकी सटीक संख्या और पूरी जानकारी एकत्र कर अपंजीकृत को पंजीकृत करने कर प्रयास है। अगर कोई संचालक ग्राहक को प्रॉपर बिल नहीं देता तो वह शिकायत कर सकता है। कार्रवाई से बचने के लिए कारोबारी टैक्स इनवाइस बिल, रसीद बुक और बिल बुक का उचित रखरखाव करें-वीडी शुक्ला, एडिशनल ग्रेड-1।

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