लखीमपुर-खीरी: येलो टेप लगाया न सुरक्षित किया घटना स्थल, भ्रम में फंसा खोजी फेरवल
फोरेंसिक टीम के पहुंचने से पहले ही बैंक के अंदर जुटी भीड़, जिला सहकारी बैंक में 32 लाख की चोरी का मामला
लखीमपुर-खीरी, अमृतविचार। हत्या, लूट, डकैती या फिर बड़ी चोरी की वारदात हो। इन वारदातों के बाद घटनास्थल पर छोड़े गए फोरेंसिक जांच पुलिस की तफ्तीश के दौरान खुलासे में काफी अहम माने जाते हैं। यही वजह है कि फॉरेंसिक और डॉग स्क्वाड के पहुंचने से पूर्व घटना स्थल पर किसी को जाने की पुलिस इजाजत नहीं देती है।
उस क्षेत्र को येलो टेप लगाकर सुरक्षित किया जाता है, लेकिन बैंक शाखा में हुई चोरी मामले में पुलिस घटनास्थल को सुरक्षित करना ही भूल गई। इससे फोरेंसिक टीम और मौके पर पहुंचे खोजी डॉग फेरवल भी भ्रम की स्थित में पड़ गया और वह बैंक के आसपास ही घूमता रहा।
जिला सहकारी बैंक शाखा में चोरी की सूचना से शहर में सनसनी फैल गई। सूचना पाकर जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विनीत मनार, शहर विधायक योगेश वर्मा समेत तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। पुलिस बल के साथ तमाम बैंककर्मी में बैंक परिसर के अंदर मौजूद रहे।
पुलिस बल ने किसी को अंदर जाने से रोकने की जरूरत नहीं समझी। ना ही येलो टेप लगाकर घटना स्थल का सुरक्षित किया गया। इससे लोग बैंक परिसर के अंदर घूमते रहे। जब तक फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचता। तब तक बड़ी संख्या में लोग बैंक परिसर के अंदर आ जा चुके थे। इससे फोरेंसिक एक्सपर्ट को भी साक्ष्य जुटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खोजी डॉग फेलवल जब मौके पर पहुंचा तो एक्सपर्ट उसे पहले उस बाथरूम की खिड़की के पास ले गया, जहां से चोर बैंक के अंदर दाखिल हुए थे।
उसके बाद लॉकर आदि में ले जाकर उसे सुंघाया गया, लेकिन डॉग फेरवल भ्रम की स्थिति में देखा गया। वह पहले तो बैंक के आसपास ही घूमता रहा। बाद में पड़ोस की गली से मंडी में बने टिनशेड की तरफ कुछ दूर चलकर रुक गया। इससे खोजी फेरवल भी कोई पुलिस की मदद नहीं कर सका। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने भी जैसे-तैसे मौके से कुछ वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। यह वैज्ञानिक साक्ष्य पुलिस की जांच में कितना अहम साबित होंगे यह तो घटना का खुलासा होने पर ही साफ हो सकेगा।
कई दिनों से रेकी, पेशेवर गैंग होने की बढ़ी संभावना
जिला सहकारी बैंक शाखा मंडी स्थल में हुई चोरी की वारदात से पुलिस की परेशानी बढ़ गई है। खास बात यह है कि जिस अंदाज में चोरों ने घटना को अंजाम दिया। उससे यह तो साफ हो गया है कि घटना को करने वाला गैंग पेशेवर है और वह कई दिनों से बैंक की रेकी कर रहा था।
नवीन मंडी स्थिल की पीछे की बाउंड्री वाल जगह-जगह से टूटी हुई है। लोगों ने शॉर्टकट से मंडी समिति आने के लिए टूटी बाउंड्रीवाल का रास्ता अपनाते हैं। बैंक जिस भवन में चल रही है। वह भवन मंडी समिति का ही है। उसे जिला सहकारी बैंक ने किराए पर ले रखा है।
मंडी समिति सचिव के कार्यालय के पीछे एक कोने में बैंक होने के कारण आम लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं थी कि मंडी समिति में बैंक शाखा भी स्थित है। सचिव के कार्यालय के पीछे एकांत में होने के कारण रात में पुलिस और सुरक्षा गार्ड भी बेपरवाह रहते हैं। चोरों ने घटना में जो तौर तरीके इस्तेमाल किए हैं। उससे साफ है कि बैंकों में चोरी करने में महारत रखते हैं।
चोरों को पता था कि बाथरूम की खिड़की को आसानी से उखाड़ा जा सकता है और उसका दरवाजा खुलने के बाद वह सीधे लॉकर रूम में पहुंच जाएंगे। इससे साफ है कि घटना से पहले चोरों ने कई दिनों तक रेकी की। उसके बाद घटना को अँजाम देने में सफल हो गए।
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