शाहजहांपुर: ट्यूबवेलों से धान की सिंचाई, गिरेगा भूजल स्तर
शाहजहांपुर, कुमार सौरभ। जनपद में बारिश न होने की वजह से किसान ट्यूबवेलों से फसलों की सिचाई कर रहे है। ट्यूबवेलों से अंधाधुंध पानी का दोहन होने से वाटर लेवल गिरने का संकट गहरा गया है। अनुपात से कम बारिश होने पर किसानों की फसल मुरझा रही है। जिले में लगभग दो लाख हेक्टेयर में …
शाहजहांपुर, कुमार सौरभ। जनपद में बारिश न होने की वजह से किसान ट्यूबवेलों से फसलों की सिचाई कर रहे है। ट्यूबवेलों से अंधाधुंध पानी का दोहन होने से वाटर लेवल गिरने का संकट गहरा गया है। अनुपात से कम बारिश होने पर किसानों की फसल मुरझा रही है। जिले में लगभग दो लाख हेक्टेयर में धान के पौध की रोपाई की गई है।
मानसून इस बार समय से नहीं आया, सावन में परर्याप्त बारिश नहीं हुई। मानसून की पहली बारिश एक जुलाई को हुई। बारिश शुरु होने से पहले ही जिले में 50 फीसदी धान की रोपाई किसानों ने ट्यूबवेल से कर ली थी। बारिश होने के बाद धान की रोपाई ने गति पकड़ी। पर्याप्त बारिश न होने की बजह से धान की फसल मुरझाने लगी है।
धान की फसल को बचाने के लिए किसान ट्यूबवेलों से सिंचाई कर रहे है। तेज धूप की वजह से धान की फसल में जल्दी-जल्दी पानी लगाना पड़ रहा है। जिस वजह से पानी का बहुत अधिक दोहन हो रहा है। कृषि प्रसार के मुताबिक किसी भी गांव के कुछ क्षेत्रफल के पांच फीसदी भूभाग में जलाशय होने चाहिए। लेकिन इस समय गांवों में तालाब का क्षेत्रफल केवल एक फीसदी ही रह गया है।
भूजल का दोहन
नलकूप से लगातार सिंचाई से 30 से 35 फीट तक जलस्तर गिर सकता है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो एक हेक्टेयर धान की फसल के लिए एक बार सिंचाई करने पर 30 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। जनपद में दो लाख हेक्टेयर धान का रकबा है। इस साल 65 से 70 फीसदी बारिश हुई है। वैज्ञानिकों का 30 फीसदी तक वाटर लेबल कम होने का अनुमान है।
पुवायां में होती है धान की अच्छी खेती
जनपद के पुवायां तहसील को मिनी पंजाब कहा जाता है। जंहा जिले का सबसे ज्यादा धान की खेती की जाती है। किसानों के निजी नलकूप हैं। जिले की अन्य क्षेत्रों में भी धान की खेती होती है वह भी लगभग सभी नलकूप से ही सिंचाई कर रहे है। जिन किसानों के पास नल कूप नहीं है वह पास के किसान के नल कूप से सिंचाई करते है। इसके लिए प्रति घंटा के हिसाब से पानी देते है। निजी नल कूप चालक पैसे के लालच में पानी का दोहन कर रहे हैं।
क्या कहते है जिम्मेदार
धान की खेती वर्षा पर आधारित है। जहां बारिश अच्छी होती है वहां पर खेती अच्छी होती है। एक हेक्टेयर धान में एक बार में 30 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस बार बारिश पर्याप्त नहीं होने से किसान नलकूप से सिंचाई कर रहे है। इससे 30 फीसदी तक भूजल का स्तर गिरने की उम्मदी है। – डाॅ. एनपी गुप्ता, कृषि वैज्ञानिक
जनपद में पुवायां तहसील पंजाब की तहर खेती की जाती है, यहां सबसे ज्यादा धानकी फसल है। पूरी जिले में दो लाख हेक्टेयर धान का रकवा है। बारिश कम होने की वजह से किसान नलूक से सिंचाई कर रहे है। इससे भूजल कम होने का खतरा है। – सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
