अब जन्म कुंडली के बजाय ‘हेल्थ कुंडली’ मिलाकर होंगे सात फेरे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

2047 तक एनीमिया को खत्म करने का बजट में लक्ष्य

हमारे देश में एक ऐसी बीमारी है, जिससे अगर पुरुष और महिला संक्रमित हों, तो उसका असर आने वाले बच्चे पर होगा। इस बीमारी का नाम है सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia)

नई दिल्ली, एजेंसी :  भविष्य में सिर्फ जन्मकुंडली मिलाने मात्र से ही शादी नहीं हो पाएगी क्योंकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एक ऐसा कार्ड तैयार कर रहा है, जिसके जरिये ही भविष्य में शादी मुमकिन होगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया कि हमारे देश में एक ऐसी बीमारी है, जिससे अगर पुरुष और महिला संक्रमित हों, तो उसका असर आने वाले बच्चे पर होगा।

इस बीमारी का नाम है सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia). ये बीमारी आदिवासी आबादियों में ज्यादा होती है। अब इस बजट में इसको 2047 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। असल में यह खून से जुड़ी एक बीमारी है। इस बीमारी में रेड ब्लड सेल्स का साइज बदलने लगता है। ये  रेड ब्लड सेल्स गोलाकर से हंसिए की तरह बन जाते हैं। ब्लड वेसेल्स में ब्लॉकेज पैदा करते हैं। ये एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर खून बनाना ही बंद कर देता है।  

Sickle Cell Anemia

इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए नया टेस्ट और हेल्थ कार्ड शुरू किया जा रहा है. इसके तहत लड़का और लड़की का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा, जिससे कि इस तरह की बीमारी का पता लगाया जा सके। अनुमान के मुताबिक 40 से कम उम्र के 7 करोड़ ट्राइबल लोगों का टेस्ट किया जाएगा।

आदिवासी आबादी में ज्यादातर आते हैं ऐसे केस

different-_tribesIndia

सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia) बीमारी खास तौर पर आदिवासियों में होती है। इस बीमारी का असर ऐसा है कि एक उम्र की सीमा पार करने के बाद बच्चे की जीने की संभावना काफी कम रह जाती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन में करीब 13 प्रतिशत बढ़ोतरी 

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 89,155 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जो 2022-23 में आवंटित की गई 79,145 करोड़ रुपये की राशि की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। 2014 से स्थापित मौजूदा 157 मेडिकल कॉलेजों के साथ में 157 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। सहयोगी अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक और निजी मेडिकल कॉलेज के संकाय सदस्यों तथा निजी क्षेत्र की अनुसंधान और विकास टीम को अनुसंधान के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की चुनिंदा प्रयोगशालाओं में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आयुष मंत्रालय के लिए बजट आवंटन 28 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,845.75 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,647.50 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बजट में आवंटित 89,155 करोड़ रुपये में से 86,175 करोड़ रुपये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को आवंटित किए गए हैं, जबकि 2,980 करोड़ रुपये स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को आवंटित किए गए हैं।