बरेली: फर्जी कॉल सेंटर का बड़ा सरगना संभल का कृष्णा निकला
बरेली,अमृत विचार। पीलीभीत बाईपास पर बेरोजगारों को ठगने वाले कॉल सेंटर का असली संचालक संभल का रहने वाला कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी करने वाला युवक निकला है। नाम है उसका कृष्ण कांत उर्फ कृष्णा। पुलिस ने कृष्णा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जांच में पता लगा है कि पीलीभीत बाईपास से तीन-चार साल …
बरेली,अमृत विचार। पीलीभीत बाईपास पर बेरोजगारों को ठगने वाले कॉल सेंटर का असली संचालक संभल का रहने वाला कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी करने वाला युवक निकला है। नाम है उसका कृष्ण कांत उर्फ कृष्णा। पुलिस ने कृष्णा को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस को जांच में पता लगा है कि पीलीभीत बाईपास से तीन-चार साल पहले कृष्णा ने शहर के डीडीपुरम में भी फर्जी कॉल सेंटर चलाया था। वहां भी उसने तमाम बेरोजगारों से इसी तरह ठगी की थी। अच्छी कमाई हुई तो कुछ समय बाद अड्डा बदलकर पीलीभीत बाईपास पर फर्जी कॉल सेंटर खोल लिया। इसका इंचार्ज उसने संभल के ही रहने वाले प्रशांत सिंह राघव को बना रखा था। उसी की देख रेख में यह सेंटर चल रहा था। प्रशांत को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। उससे की गई पूछताछ में ही कृष्णा का नाम सामने आया था।
पुलिस के अनुसार, बेरोजगारों से ठगी के लिए कॉल सेंटर पर 12 लड़कियों को नौकरी पर रखा गया था, जो डेटा के रिकार्ड से बेरोजगारों को कॉल करके नौकरी दिलाने के नाम पर सुविधा शुल्क के रूप में उनसे कृष्णा के बैंक एकांउट में पैसा जमा कराती थीं। पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कृष्णा ने फर्जी नाम और पते पर सिम ले रखे थे और फर्जी पते पर ही बैंक एकाउंट खुलवाकर लाखों रुपये की ठगी की गई।
पांच हजार में मिलता था 15 हजार लोगों का डाटा
पुलिस के अनुसार, कृष्णा से पूछताछ में पता चला है कि उसे कुछ लोग पांच हजार रुपये में 15 हजार बेरोजगारों के बायोडाटा की जानकारी देते है। उसका फर्जी सेंटर महीने में 50 हजार रुपये का डाटा खरीदने के बाद हजारों लोगों को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की ठगी करता था। लाकडाउन के बीच अकेले प्रशांत राघव ने ही तीन हजार लोगों को अपना निशाना बनाया था। इंजीनियरिंग पास युवक का बायोडेटा देखकर कृष्णा और उसके गैंग के लोग किसी इंजीनियर से उसका फोन पर साक्षात्कार करवाते थे और नौकरी देने के नाम पर उनसे एक लाख रुपये तक अपने एकाउंट में डलवा लेते थे। ऐसे तमाम लोगों की जानकारी पुलिस को हुई है, जिनसे मोटी रकम ठगी गई है।
एकाउंट और सिम मुहैया कराता है सुधीर
पुलिस की पड़ताल और कृष्णा व प्रशांत राघव से पूछताछ में इस सेंटर पर ठगी में बबराला के सुधीर का नाम भी सामने आया है। बताया गया है कि सुधीर सप्ताह में एक बार बरेली आता था। इसका काम कृष्णा और प्रशांत को फर्जी आईडी के सिम और ऐसे एकाउंट नंबर मुहैया कराना होता था, जिनसे वह पैसा निकाल सकता था। उसे हर एकाउंट नंबर पर आने वाली रकम का 30 प्रतिशत दिया जाता था। ठगी का यह खेल चलता रहे और वे पुलिस की गिरफ्त में न आए। इसके लिए वे लोग 15 दिनों बाद अपने द्वारा चलाए जा रहे मोबाइल नंबर और अपनी वेबसाइट को बदल दिया करते थे और जिन लोगों से बात हो जाती थी। उनके डेटा को जला दिया करते थे।
लैपटॉप और मेल सील
छापेमारी के दौरान फर्जी कॉल सेंटर में मौके से मिले पांच लैपटॉप और उनके द्वारा प्रयोग की जा रहीं ई-मेल को पुलिस ने सील कर दिया गया है। पुलिस ने ई-मेल के पासवर्ड बदल दिए हैं। इससे वे लोग यह डाटा अब डिलिट नहीं करा सकेंगे। पुलिस ने व्हाट्सअप की चैट को भी सुरक्षित कर अपने पास रखा है।
लड़कियां ने भी खोल रखे है अपने सेंटर
पुलिस की जांच में सामने आया है कि कृष्णा के कॉल सेंटर पर काम करने वाली कई लड़कियों ने भी अपना कॉल सेंटर खोलने के बाद इससे मोटी कमाई की है। पुलिस को यह भी पता चला है कि इस समय पीलीभीत और बीसलपुर में भी कई सेंटर चल रहे है। उनकी जानकारी जुटाई जा रही है।
“प्रशांत और कृष्णा समेत उनके दो अन्य साथियों और वहां काम करने वाली 12 लड़कियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। धोखाधड़ी और कॉपी राइट एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। जल्द ही और लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा।” -शितांशु शर्मा, इंस्पेक्टर बारादरी
