Chitrakoot News : गहमागहमी के बीच शुरू हुआ राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन, Swami Prasad Maurya के आने की खबर पर भाजयुमो ने दिया धरना
चित्रकूट में भाजयुमो ने धरना दिया।
चित्रकूट में गहमागहमी के बीच राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन शुरू हुआ। वहीं, स्वामी प्रसाद के आने की खबर पर भाजयुमो ने धरना दिया।
चित्रकूट, अमृत विचार। मुख्यालय में रविवार को राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन की गहमागहमी में शुरुआत हुई। सम्मेलन में आने वाले लोगों का विरोध कर भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने वहीं पर सड़क किनारे धरना दे दिया और जमकर नारेबाजी की। उधर, सम्मेलन के आयोजकों ने कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक कार्यक्रम है। इसमें बौद्ध धर्म के मानने वालों के साथ पंचशील सिद्धांत पर चर्चा की जा रही है।
भाजपा के लोग धर्म के नाम पर किसी भी बात का विरोध करते हैं, जो उचित नहीं। उन्होंने कहा कि उनको एक अधिकारी ने यह तक बताया कि कार्यक्रम में पल्लवी पटेल को आने से रोकने के लिए केशव प्रसाद मौर्य (उप मुख्यमंत्री) तक का फोन यहां प्रशासन के पास आया।
रमाबाई अंबेडकर, संत गाडगे, संत रविदास की जन्म जयंती पर हुए राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के मुख्य आयोजक कैलाश बौद्ध ने बताया कि सम्मेलन में स्वामी प्रसाद मौर्य, पल्लवी पटेल आदि को भी आना था पर उनको प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपाई इस तरह के कार्यक्रमों में जानबूझकर व्यवधान पैदा करते हैं।
जबकि संविधान ने सबको बोलने की आजादी दी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान लोगों को पंचशील सिद्धांत के पालन की शपथ भी दिलाई जाएगी। प्रशासन को ऐसा लगता है कि यह आयोजन सरकार के विरोध में है। पहले यह कार्यक्रम 12 फरवरी को था पर प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। दोबारा कई शर्तों पर अनुमति दी गई।
मुख्य अतिथि स्वामी प्रसाद मौर्य, पल्लवी पटेल और रागिनी सोनकर को आना था पर प्रशासन ने हमसे लिखवा लिया कि ये नहीं आएंगे, तभी अनुमति दी गई। इसके पीछे उनकी दलील थी कि स्वामी प्रसाद के आने से दंगा हो जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि हमारे कार्यक्रम को लेकर गलत बातें की गईं और गांवों में दुष्प्रचार किया गया। इसके बाद भी भारी तादाद में लोग आए। उन्होंने कहा कि भाजपा डरी हुई है। अब दलित पिछड़े लोग जाग रहे हैं और ऐसे में इस तरह के कार्यक्रमों से उनमें जागरूकता आएगी।
उन्होंने दावा किया कि एक अधिकारी ने नाम छिपाते हुए यह तक बताया कि उनके पास केशव प्रसाद मौर्य का फोन आया कि पल्लवी पटेल ने उन्हें हराया है, इसलिए वह यहां नहीं आनी चाहिए। आयोजन में सपा नेता मानसिंह पटेल का विशेष योगदान रहा। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष अनुज सिंह यादव, पूर्व विधायक मानिकपुर दद्दू प्रसाद आदि मौजूद रहे। भाजयुमो और हिंदूवादी संगठनों के विरोध से माहौल में काफी गर्मागर्मी हो गई। इसके मद्देनजर आयोजन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती रही।
हमें धर्म को मानने की आजादी
कैलाश ने कहा कि देश में संविधान सबको अपने हिसाब से धर्म को मानने की आजादी है। हिंदूवादी संगठनों को आखिर समस्या क्या है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक आयोजन नहीं पर बाबा साहेब ने कहा था कि हर व्यक्ति राजनीति करता है। चुनाव के समय हर व्यक्ति राजनीतिक हो जाता है। आखिर बुद्ध से इनको क्या समस्या है।
क्यों मांगे स्वामी प्रसाद मौर्य माफी- ब्रजेश प्रजापति
बीजेपी छोड़कर सपा में आए तिंदवारी के पूर्व विधायक ब्रजेश प्रजापति का भी आने पर विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि ये पाखंडी पुजारी हैं। अगर हम लोगों ने मिलजुलकर नारा दिया कि वापस जाओ तो इनको देश में जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि क्यों स्वामी प्रसाद मौर्य माफी मांगे। क्या अगर हम लोग दलितों पिछड़ों, आदिवासियों महिलाओं के स्वाभिमान की बात करते हैं तो गलत हैं। क्या 97 फीसदी लोगों की भावनाएं नहीं हैं। क्या हमारी भावनाएं आहत नहीं होतीं।
बैनर में नजर आए ये चेहरे
सम्मेलन के बैनर पर स्वामी प्रसाद मौर्य, सदर विधायक अनिल प्रधान के भी चित्र थे। इनके अलावा बैनर में विशंभर यादव, ब्रजेश प्रजापति, दद्दू प्रसाद, शिवशंकर यादव, गयादीन अनुरागी, विशंभर निषाद, शिवशंकर पटेल आदि स्थानीय और अन्य जनपदों के प्रमुख नेताओं के चेहरे नजर आए।
धर्म के गद्दारों को...
उधर, कार्यक्रम में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के आने की सुगबुगाहट से हिंदूवादी संगठनों और भाजयुमो के लोग आयोजन स्थल के बाहर धरना देकर बैठ गए। इन लोगों ने धर्म के गद्दारों को... आदि नारे भी लगाए। इनका कहना था कि धर्म और भगवान राम का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
