Kanpur News: घाटमपुर में किसानों ने खून से चिट्ठी लिखकर लगाई न्याय की गुहार, भष्टाचार चरम पर होने का लगाया आरोप

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के घाटमपुर में किसानों ने खून से चिट्ठी लिखी।

कानपुर के घाटमपुर तहसी ल में अनशन पर बैठे किसानों ने खून से चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई। किसानों ने चिट्ठी लिखकर कानपुर में भष्टाचार चरम पर होने का आरोप लगाया।

कानपुर, अमृत विचार। तहसील में भ्रटाचार में डूबे अधिकारियों की मनमानी के चलते किसानों ने तहसील परिसर में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया था। वहीं कोई भी अधिकारी किसानों से बात करने अभी तक नही पहुंचा है। किसानों का आरोप है कि आधिकारियों ने तहसील में दलालों को रखा है। जिसके चलते तहसील में भ्रष्टाचार हो रहा है। आरोप है कि अधिकारी आईजीआरएस में भी गलत रिपोर्ट लगा रहे है। शिकायत के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मामले में संज्ञान नहीं ले रहे है।

वहीं, बुधवार को किसानों ने खून से चिट्टी लिखकर प्रदेस के मुखिया योगी आदित्यनाथ को किसानों का दर्द बयां किया है। चिट्टी में घाटमपुर तहसील अनशन पर बैठे किसानों ने खून से चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई।किसानों ने चिट्ठी लिखकर कानपुर में भ्रस्टाचार चरम पर होने का आरोप लगाया। किसानों ने खून से लिखी चिट्ठी में सीएम योगी को बताया अंतिम आशा। तहसील के भ्रस्टाचारी कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन(भानु गुट) कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं।

Ghatampur

भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत फौजी, जिलाध्यक्ष रोहित सिंह, तहसील अध्यक्ष रोहित सिंह सेंगर, शैलेंद्र सिंह, राजा सिंह, जगदीश समेत एक सैकड़ों किसानों ने घाटमपुर तहसील परिसर में अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया। तहसील में तैनात हर लेखपाल के पास अपना एक दलाल है। जिसके चलते तहसील के कर्मचारी किसानों की बात नही सुनते है। किसानों को अधिकारियों से अपनी समस्या बताने के लिए दलालों को पहले अपनी बात बतानी होती है। जिसके बाद दलाल किसानों की बात अधिकारियों को बताते है।
 
लेखपाल किसानों की बात नहीं सुनते। उन्होंने बताया कि देर रात आठ बजे उन्होंने तहसीलदार कोर्ट खुला हुआ देखकर पहुंच गए। आरोप है कि वहां पर कुछ बाहरी लोग बैठे हुए थे। उनका कहना है कि धरने पर कोई भी अधिकारी किसानों को समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे चलते तहसील में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते ।
 

 

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