बरेली: किसी को पैसे खर्च करना अच्छा लग रहा तो कोई बेवजह नाराज
युवा हो रहे मेनिया के शिकार, मानसिक अस्पताल और मन कक्ष में आ रहे ऐसे रोगी
बरेली, अमृत विचार। मौसम में बदलाव के साथ मेनिया (उन्माद) मानसिक बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें ऐसे रोगी भी हैं, जिन्हें पैसे उड़ाना अच्छा लग रहा है तो कोई अचानक गाने सुनते हुए कमरे में रखी चीजें हवा में उछालने लगता है। कुछ मरीजों के मन में विवाह को लेकर इतना भय है कि शादी तय होने के बाद परिजनों से झगड़ने लगते हैं। इस तरह के रोगी जिला अस्पताल स्थित मन कक्ष में आ रहे हैं।
मन कक्ष प्रभारी के अनुसार मौसम में बदलाव के बाद ही मेनिया के मरीज बढ़ते हैं। 15 दिन में ऐसे मरीजों की संख्या 100 के करीब पहुंच गई है। मन कक्ष में आने वाले मरीजों की काउंसिलिंग के साथ उपचार किया जा रहा है। वहीं, मानसिक चिकित्सालय में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। जनवरी में 300 से 350 मरीज आ रहे थे, वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 450 तक पहुंच गई है।
क्या होता है मेनिया
मन कक्ष प्रभारी डॉ. आशीष के अनुसार ऐसे लोग एक पल में नाराज तो दूसरे पल में खुश हो जाते हैं। उनकी सोच और व्यवहार बदलते रहते हैं। ऐसा बायपोलर बीमारी की वजह से होता है। इसे उन्माद अथवा मेनिया के नाम से जाना जाता है। यह मानसिक बीमारी है, इसके बिना कारण हंसना, बोलना, नाचना, गाना, सोने की इच्छा में कमी आना, क्षमता से परे खर्चे करने की इच्छा रखना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाना आदि लक्षण हैं। यह बीमारी ज्यादातर युवा अवस्था में होती है। इसका उपचार संभव है।
केस एक
शहर के जोगी नवादा निवासी 23 वर्षीय युवक दस दिन में घर से निकल चौराहे पर जाकर लोगों का इकट्ठा करके जबरन उन्हें खरीददारी कराता है। कई दिनों तक यह सिलसिला चला तो परिजन उसे मन कक्ष लेकर पहुंचे, डॉक्टर ने उसे मेनिया से ग्रसित बताया, युवक की काउंसिलिंग की जा रही है।
केस 2
नवाबगंज निवासी 37 वर्षीय युवक सुबह उठने के साथ ही लगातार परिजनों से गुस्सा कर रहा है। घर में कोई भी आता है तो वह बेवजह उन पर नाराज हो जाता है। परिजन उसे स्थानीय सीएचसी लेकर आए, जहां से उसे मन कक्ष रेफर किया गया। युवक मेनिया से ग्रसित मिला। 15 दिन काउंसिलिंग और उपचार के बाद युवक का व्यवहार सामान्य हो रहा है।
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