बरेली: किस्तों में फंसी आस...पक्की छत का ख्वाब अधूरा
बरेली, अमृत विचार। शासन की मंशा है हर गरीब के सिर पर पक्की छत हो, इस सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जा रही है, लेकिन शहर की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस योजना के पात्रों को किस्तों के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। दूसरी किस्त नहीं मिलने से तीन हजार से अधिक गरीबों के मकान पूरे नहीं हो सके हैं। उन्हें खुली छत के ही नीचे रात काटनी पड़ रही है।
शासन ने 2022-23 में 7528 आवासों का लक्ष्य दिया था। पीएम आवास के लिए तीन किस्तों में 1.20 लाख की रुपये दिए जाते हैं। पात्र को पहली किस्त में 40 हजार, दूसरी में 70 और तीसरी किस्त में 10 हजार रुपये की धनराशि मिलती है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पात्रता सूची के आधार पर 7526 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें पीएम आवास की पहली किस्त 7250 लाभार्थियों के खाते में भेजी जा चुकी है। जिसके बाद सभी ने अपने-अपने कच्चे मकान तोड़कर उन्हें नया बनाने के लिए निर्माण कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन चारों दीवारें खड़ी होने के बाद अब छत बनाने के लिए इसमें 3553 लाभार्थियों को दूसरी किस्त का इंतजार करना पड़ रहा है। कई महीने से वे दूसरी किस्त के लिए अफसरों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। ब्लाक व मुख्यालय पर पहुंचने वाले लाभार्थियों को अधिकारी शासन से पैसा मिलने पर जल्द दूसरी किस्त भेजने की बात कहकर टकरा रहे हैं।
अफसर आवास दिलाने का वादा कर रहे, सचिव धमका रहा
फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक के काशीपुर मजरा बफरी के लल्लू वन को सुविधा शुल्क नहीं मिलने पर अपात्र कर दिया गया था। कमिश्नर के निर्देश पर सीडीओ की ओर से जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी की जांच में इसका खुलासा हो चुका है। शनिवार को मुख्यालय पहुंचे लल्लू वन ने बताया कि अफसर आवास दिलाने की बात कह रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उसे अपात्र दर्शाने वाला सचिव अंजाम भुगतने की धमकी दे रहा है। खास बात यह है कि चार से पांच बार इस मामले की जांच विभिन्न अधिकारियों के स्तर से की जा चुकी है, लेकिन बेटे का पक्का मकान दिखाकर गुमराह कर दिया जाता है।
मुख्यमंत्री आवास योजना में भी पिछड़ रहे
विभाग के मुताबिक शासन से मुख्यमंत्री आवास योजना में 185 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें 88 लाभार्थियों को पहली किस्त, 86 लाभार्थियों को दूसरी, 50 लाभार्थियों को तीसरी किस्त भेजी जा चुकी है। इसके अलावा 50 आवास अब तक पूर्ण हो चुके हैं।
छप्पर डालकर गुजर बसर कर रहे जिंदगी
मीरगंज के ग्राम सादात निवासी मो. फारुख व उनकी पत्नी नगमा ने बताया कि बरसात के दिनों में रात जागकर गुजारनी पड़ती है। पक्की छत का सपना अभी तक पूरा नहीं हो सका है। पात्र होने के बाद भी उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। वर्षों से छप्पर के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं। शुक्रवार को गांव में चौपाल आयोजित हुई तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया।
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