Right to health Bill पर लखनऊ के चिकित्सकों में आक्रोश, आन्दोलन की हो रही तैयारी
लखनऊ, अमृत विचार। राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जहां पर राइट टू हेल्थ बिल को मंजूरी दे दी गई है, लेकिन इस बिल को लेकर चिकित्सकों का एक बड़ा वर्ग नाराज है और वह चाहता है कि इस कानून को वापस लिया जाये। राजस्थान सरकार की घोषणा के बाद इस कानून का सबसे पहले विरोध इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने किया। आईएमए के पदाधिकारियों की माने तो इस इस बिल में निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की अनदेखी की गई है।
आईएमए के पदाधिकारियों की माने तो राइट टू हेल्थ बिल के तहत निजी अस्पतालों को भी सभी बीमारियों का इलाज निशुल्क करना होगा। ऐसे में निजी अस्पताल के खर्चे कैसे निकलेंगे और जब खर्च ही नहीं निकलेगा तो अस्पताल बंद हो जायेंगे। हालांकि सरकार का यह दावा है कि जो मरीज पैसे देने की स्थित में नहीं होगा। उसके इलाज का खर्च सरकार उठायेगी।
लखनऊ आईएमए के प्रवक्ता डॉ. प्रांजल के मुताबिक राजस्थान सरकार का यह फैसला गलत है। डॉक्टरों में इस फैसले को लेकर काफी रोष व्याप्त है। लखनऊ आईएमए इस एक्ट के विरोध में उतरने की तैयारी कर चुका है। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान में चिकित्सकों की तरफ इस बिल के विरोध में किये जा रहे प्रदर्शन में पुलिस द्वारा किये गये बल प्रयोग की भी निंदा की है। उन्होंने कहा कि 27 मार्च को नेशनल प्रोटेस्ट डे के रूप में मनाये जाने की घोषणा आईएमए की तरफ से हो चुकी है। लखनऊ इकाई जल्द ही इस विषय पर जानकारी साझा करेगी।
दरअसल, इस बिल के जरिये राजस्थान में लोगों के लिए स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का अधिकार देने की बात की जा रही है। इसमें राज्य के लोगों के लिए निशुल्क रूप से स्वास्थ्य सुविधा शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस बिल के तहत निजी अस्पतालों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए राज्य और जिला स्तर पर एक कमेटी भी बनाई जायेगी। जिसमें जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल रहेंगे। यह कमेटी किसी भी अस्पताल और उसके दस्तावेजों की जांच कभी भी कर सकेगी।
जनता को यह मिलेगा अधिकार
1- स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए लोगों को जानकारी लेने का अधिकार।
2- सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में निशुल्क परामर्श, इलाज, दवा तथा एंबुलेंस का अधिकार।
3- सार्वजनिक अस्पतालों में सर्जरी के लिए निशुल्क या फिर कम शुल्क में देखभाल का अधिकार।
4- चिरंजीवी योजना के तहत कवर किए गए लोगों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निशुल्क इलाज का अधिकार समेत इस बिल में कई अन्य अधिकार भी दिये गये हैं।
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