मुरादाबाद: रैंकिंग में बढ़े कदम फिर भी स्वच्छता में बहुत पीछे हैं हम

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वच्छता के मामले में मुरादाबाद को नंबर वन बनाने का सपना इस बार भी पूरा नहीं हो सका। पहला नंबर तो दूर अपना शहर टॉप-100 में भी जगह नहीं बना सका। कहां चूक हुई, इसे कैसे सुधारेंगे, अभी भी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, पिछले साल से पीतल नगरी की रैंकिंग में …

मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वच्छता के मामले में मुरादाबाद को नंबर वन बनाने का सपना इस बार भी पूरा नहीं हो सका। पहला नंबर तो दूर अपना शहर टॉप-100 में भी जगह नहीं बना सका। कहां चूक हुई, इसे कैसे सुधारेंगे, अभी भी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, पिछले साल से पीतल नगरी की रैंकिंग में कुछ सुधार जरूर हुआ है लेकिन यह प्रगति संतोषजनक नहीं कही जा सकती। केंद्र की ओर से गुरुवार को स्वच्छता सर्वे की रिपोर्ट जारी कर दी है। रैंकिंग जारी होने के बाद हालत यह हुई कि नगर आयुक्त से लेकर महापौर तक इस मामले में बात करने से कतराते नजर आए।

केंद्र के स्वच्छता सर्वे में मुरादाबाद 117वें नंबर पर है, प्रदेश में उसे 14वां स्थान मिला है। यह नंबर पिछले साल से बेहतर जरूर है लेकिन जो अपेक्षा की जा रही थी, नगर निगम उसमें खरा नहीं उतरा। कारण, सफाई को लेकर ठोस कदम न उठाना भी माना जा रहा है। कहने को तो डोर-टु-डोर कूड़ा कलेक्शन हो रहा है लेकिन कंपनी और नगर निगम की खींचतान से यह योजना भी मजाक बनकर गई है।

ट्रीटमेंट प्लांट में कूड़े का पहाड़ हर साल नई ऊंचाइयां छू रहा है। अब जाकर प्लांट का ताला तो खुला है पर मशीनें अभी भी शांत हैं। डलावघर और डस्टबिन होने के बावजूद सड़क पर कूड़ा मिलने की परंपरा नगर निगम खत्म नहीं करा सका। गड्ढे और नालियों के चोक होने के कारण बिखरने वाली गंदगी से तो लोग हर वक्त परेशान रहते हैं। लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने में भी निगम कुछ खास नहीं कर सकी। होर्डिंग्स लगाने और स्लोगन चिपकाने में तो निगम ने खूब पसीना बहाया लेकिन न लोग जागरूक हुए और न ही उन्हें जागरूक करने में होर्डिंग्स से आगे कुछ हो सका। नतीजा यह रहा कि नंबर एक का सपना देखने वाला मुरादाबाद टॉप-100 में भी जगह नहीं बना सका।

-रैंकिंग में बढ़े कदम फिर भी स्वच्छता में बहुत पीछे हैं हम
-नंबर एक का सपना चकनाचूर, टॉप 100 में भी नहीं मुरादाबाद
-केंद्रीय रिपोर्ट कार्ड में स्वच्छता सर्वे में 117वें नंबर पर है अपना शहर
-प्रदेश में हासिल किया 14वां स्थान

पिछले सालों में कौन सा था स्थान
वर्ष रैंकिंग
2017 321
2018 274
2019 195
2020 117

पड़ोसी जिले बरेली से चार कदम आगे हैं हम
बरेली नगर निगम से सफाई के मामले में मुरादाबाद नगर निगम ने जरूर अच्छे अंक पाए हैं। बरेली के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन की बदौलत हम उससे चार कदम आगे निकले हैं। यूपी में मुरादाबाद का 14वां स्थान है जबकि बरेली की रैंकिंग 18 है।

ऐसे कैसे बनेंगे नंबर वन

मजाक बन गई डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन योजना
डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन योजना मजाक बनकर रह गई है। पहले ट्रंचिंग ग्राउंड से लेकर डोर टु डोर की जिम्मेदारी एटूजेड कंपनी को दी गई थी। 2018 में इस कंपनी को दो जोन के 16 वार्डों से कूड़ा कलेक्शन करना था। इसे लेकर उसकी टीम तैयार थी। इसके बाद कंपनी के साथ पेमेंट का विवाद हुआ और धीरे-धीरे यह नौ दो ग्यारह हो गई। वर्तमान में यह काम हिंदुस्तान सिक्योरिटी और एसआरएमटी वेस्ट मैनेजमेंट के पास है। जुलाई में एसआरएमटी से निगम का फिर पेमेंट विवाद हुआ और पखवाड़े भर डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन योजना का फिर मजाक बन गया।

सड़कों के गड्ढे, स्मार्ट सिटी पर धब्बे
रामगंगा विहार और आशियाना की सड़कों पर एक किमी रेंज में 40 से 50 गड्ढे देखे जा सकते हैं। पुराने शहर में झब्बू का नाला, अंडेवालान, रेती स्ट्रीट, बरवालान, बारादरी सहित कई इलाके हैं, जहां की सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। आए दिन ये गड्ढे हादसे का सबब बनते हैं। हालत तब और खराब होती है जब बारिश में ये गड्ढे और विकराल रूप लेने लगते हैं। स्मार्ट सिटी पर ये गड्ढे सिर्फ धब्बे साबित हो रहे हैं। स्वच्छता पर शहर की तस्वीर जब तक साफ नहीं होगी, स्मार्ट और स्वच्छ सिटी में नंबर एक बनना मुश्किल होगा।

ट्रंचिंग ग्राउंड का ताला खुला, मशीनें अब भी जाम
आठ साल से ज्यादा का समय हो गया। दो कंपनियां भी निगम ने हायर कीं लेकिन ट्रंचिंग ग्राउंड का मकसद पूरा नहीं कर सकीं। एटूजेड कंपनी को जब इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई तो निगम अफसर भी बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते थे। बाद में इस कंपनी से करार खत्म हो गया और दूसरी कंपनी हरीभरी को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई। ट्रंचिंग ग्राउंड पर शहर का कूड़ा तो इकट्ठा होता रहा लेकिन इस कूड़े के निस्तारण में जो मशीनों का काम था, वह आज तक नजर नहीं आया। जैसे-तैसे इस साल ट्रंचिंग ग्राउंड का ताला खुल गया लेकिन मशीनें अब भी जाम हैं।

सिर्फ पोस्टरों पर ही चलता रहा निगम का अभियान
सफाई अभियान पर किसी ने सवाल कर दिए तो उस पर जुर्माना ठोकने में नगर निगम ने भी खूब तेजी दिखाई। गंदगी लोग न करें, इसका पाठ पढ़ाने में सिर्फ पोस्टर के सहारे ही निगम सड़क पर उतर पाया। न तो वह लोगों को जागरूक कर पाया और न ही स्वच्छता का पाठ पढ़ा पाया। नतीजा यह रहा, कि आज भी लोग कूड़े के लिए खाली प्लाट ढूंढते रहते हैं या सड़क पर ही फेंक कर चंपत हो जाते हैं। लोगों की आदत न बदल पाने का ठोस कारण, निगम कभी तलाश ही नहीं सका। डोर टू डोर कलेक्शन योजना की नाकामी इसकी सबसे बड़ी वजह रही।

वार्डों की स्वच्छता व जागरूकता में नहीं दिखे ‘गंभीर’
सहायक नगर आयुक्त गंभीर सिंह ने माना कि वार्डों की स्वच्छता और लोगों को जागरूक करने में नगर निगम गंभीर नहीं रहा। गंभीर सिंह ने बताया कि पिछले साल से रैंकिंग में सुधार आया है लेकिन जो नतीजा हम सोच रहे थे वह नहीं आया। 66 वार्डों की सफाई बेहतर रही, स्वच्छता सर्वे टीम ने इन वार्डों को अच्छे नंबर भी दिए। गीला कचरा के मामले में चार वार्डों की सफाई में हम पिछड़ गए, जो थ्री स्टार मिलने चाहिए थे, वे नहीं मिले और 332 नंबर ही मिल सके। 600 नंबर का नुकसान हो गया। लोगों को जागरूक करने में पोस्टर, नुक्कड़ नाटक, जन जागरूकता अभियान आदि सब किया, लेकिन इसमें भी 1500 के मुकाबले 1084 अंक ही हासिल कर सके। अबकी बार इन सभी खामियों को सुधारेंगे।

 

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