UP Nikay Chunav 2023 : किचन से निकलीं, लैपटॉप देखा और प्रचार को निकल पड़ीं BSP महापौर प्रत्याशी अर्चना निषाद

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Edited By Amrit Vichar
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UP Nikay Chunav 2023 कानपुर में बसपा से महापौर प्रत्याशी अर्चना निषाद को जनता का समर्थन मिल रहा।

UP Nikay Chunav 2023 कानपुर में बसपा से महापौर प्रत्याशी अर्चना निषाद ने कहा कि बसपा को जनता का समर्थन मिल रहा। भ्रष्टाचार के भंवर में भाजपा। इसके साथ ही कहा कि गरीब प्राथमिकता, ट्रैफिक, छुट्टा पशु, सफाई, पानी बड़ी चुनौती।

कानपुर, अमृत विचार। UP Nikay Chunav 2023 बहुजन समाज पार्टी की मेयर प्रत्याशी अर्चना निषाद जिस अंदाज से बसपा चुनाव चिन्ह का दुपट्टा और नीली पगड़ी पहने घर पर ही बने अपने कर्यालय में कार्यकर्ताओं के बीच आयीं और बोली आज का कहां-कहां संपर्क का कार्यक्रम है। इससे लगा प्रत्याशी तेज और समझदार हैं।

अमृत विचार से मुखातिब होते ही बोली भइया सुबह उठकर इनकी चाय, बच्चों का नाश्ता आदि पैक करके यानी रसोई करके आई हूं, अब प्रचार में जाऊंगी फिर रात 10 या 11 भी बज जाता है लौटते लौटते। बसपा को जनसमर्थन मिल रहा है। हम सबके लिए चुनौती बने हैं।

कानपुर में मेयर के लगभग हर चुनाव में एक लाख से नीचे ही वोट हासिल करने वाली बसपा की वर्तमान प्रत्यासी अर्चना निषाद को लगता है कि लोग बसपा की तरफ देख रहे हैं। भाजपा पर निशाना साधते हुए वह कहती हैं कि सबको परखा बार-बार बसपा को परखो एक बार। उनकी सीधी लड़ाई भाजपा से है। बातचीत शुरू ही हुई थी कि वह अपने पति रामनारायन निषाद की ओर देखते हुए कुछ कहती हैं।

निषाद मोटी सी डायरी निकालकर खोलते हैं, इस बीच प्रत्यासी अर्चना निषाद हम लोगों से एक मिनट का इशारा करते हुए पास ही रखे लैपटॉप ऑन करने लगती हैं। कुछ देखने और डायरी लिए बैठे अपने पति रामनारायन निषाद से प्रचार संबंधी बात करती हैं। फिर मुखातिब होती हैं, तो उनसे सवाल किया जाता है कि रसोई भी संभालती हैं और लैपटॉप से चुनाव प्रबंधन भी। अर्चना निषाद बोली, भइया राजनीति के माध्यम से समाज सेवा के क्षेत्र में उतरी हूं तो घर भी देखना है और समाज भी।

बसपा प्रत्यासी अर्चना निषाद कहती हैं कि उनकी पार्टी बसपा गरीबगुरबों की पार्टी है। उनकी चिंता सबसे पहले करनी पड़ती है। तभी उनके पति रामनारायन बोल पड़ते हैं कि हम लोगों एक राउण्ड वार्डों की परिक्रमा कर ली है। कार्यक्रम हमारा संगठन तय करता है। इस बीच प्रत्यासी अर्चना निषाद कहती हैं कि संगठन पूरे मन से लड़ा रहा है। आप देख ही रहे हो कि कार्यकर्ता और समर्थक सुबह घर पर आ जाते हैं। इस बीच वह मना करने के बाद भी रसोई में चाय बनाने को चल देती हैं। थोड़ी देर गृहणी की माफिक ट्रे पर चाय नमकीन बिस्कुट रखकर ले आती हैं।

वह कहती हैं की बीस साल तक भाजपा ने शहर पर राज किया है। अब डबल इंजन, ट्रिपल इंजन की बातें करती है। मैं पूछती हूं कि बीते पांच साल ही ले लो, किया क्या? आपको आजादनगर से बड़ा चौराहा जाना हो तो कितना जाम लगता है, जानते ही होंगे। कभी कभी एक घंटा लग जाता है। जाम के साथ ही सड़कों पर अतिक्रमण, चींटी की तरह वाहन रेंगते हुए चलते हैं।

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सुविधाओं का यह हाल है कि हाउस टैक्स जो मन आया लगा दिया। कहो बगल वाले का हो पांच हजार तो आपका पच्चीस हजार। हाउस का मानक क्या है जनता को बताओ तो। दर असल नीयत साफ नहीं है। भाजपा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा है। सभी गैर भाजपा पार्टियां यही मुद्दा उठाए हैं। मैं सहमत हूं। जनता का ही पैसा है। हिसाब दो। इनकी जलकल व्यवस्था फेल है। 

वह कहती हैं कि एक भी घर कोई बता दे जहां पर समय पर पानी आता हो। मोटर, बोरिंग न हो तो लोग प्यासे मर जाएं। कानपुर में जलस्तर कितना गिर गया है। गंगा में पानी कितना कम है। प्रदूषित पानी को साफ करने के नाम पर प्रोजेक्ट चलते हैं पर नतीजा क्या? छुट्टा पशुओं की भरमार से किसान ही नहीं बल्कि शहरी परेशान है। सड़कों पर इन पशुओं के कारण लोगों की जानें जा रही हैं।

प्रत्याशी अर्चना निषाद कहती हैं कि मलिन बस्तियों का वोट, हमारे निषाद समाज का वोट के अलावा बसपा का अपना आधार है। अब तो ब्राह्मण भी बसपा को वोट करने लगा है। समीकरण पक्ष में है। आगे देखिए क्या होता है। इस बीच कार्यकर्ताओं की चहलकदमी शुरू हो जाती है। वह केंद्रीय चुनाव कार्यालय के उद्घाटन और संपर्क अभियान की तैयारियों में व्यस्त हो जाती हैं।

 

 

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