बरेली: एजेंसियों का कार्यकाल खत्म, फिर कौन करा रहा है डोर टू डोर सर्वे
बरेली, अमृत विचार। इधर चुनाव खत्म हुआ, उधर घरों में सर्वे करने वालों का तांता लग गया है। खुद को नगर निगम का कर्मचारी बताने वाले ये लोग नाम-पते के साथ गृहस्वामी का मोबाइल नंबर भी अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि यह डोर टू डोर सर्वे है जो नगर निगम करा रहा है, लेकिन दूसरी ओर नगर निगम के अफसर ऐसा कोई सर्वे कराने से इन्कार कर रहे हैं। कई इलाकों में लोग ठगी और धोखाधड़ी की आशंका जता रहे हैं।
नगर निगम में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कराने वाली दोनों एजेंसियों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। फिर भी इन एजेंसियों के कर्मचारी घर-घर सर्वे करने में जुटे हुए हैं। लोगों में आशंका वजह से है क्योंकि यह साफ नहीं है कि यह सर्वे कौन और क्यों करा रहा है। लोगों का कहना है कि सर्वे करने के लिए कर्मचारी उस वक्त घर पहुंचते हैं, जब पुरुष काम पर जा चुके होते हैं और घर में महिलाएं ही होती हैं। नाम-पता और मोबाइल नंबर पूछने के साथ ये लोग अपने साथ मौजूद रजिस्टर में फोन नंबर का मिलान भी करते हैं।
मंगलवार सुबह मुंशीनगर में हल्का-फुल्का हंगामा भी हुआ। सर्वे करने आए कर्मचारी ने लोगों के कहने पर आईकार्ड दिखाया तो वह 2020 तक ही मान्य था। राजेंद्रनगर में भी बाइक पर नगर निगम पर स्टिकर लगाकर सर्वे कर रहे एक युवक को भी लोगों ने रोककर पूछताछ की। उसने खुद को डोर टू डोर कंपनी की सर्वे टीम का सदस्य बताया। मुंशीनगर के धर्मपाल सिंह ने बताया कि यह साफ नहीं है कि सर्वे करने वाले लोग नगर निगम के ही कर्मचारी हैं। कंपनी को उन्हें आईकार्ड देने के साथ ड्रेस कोड भी तय करना चाहिए। अपरिचित लोगों को भी सर्वे के लिए नहीं भेजना चाहिए। राजेंद्रनगर के राजकुमार ने कहा कि अनजान लोगों के घर-घर आकर नाम-पता पूछने से लोगों में आशंका का माहौल है। अफसरों को स्थिति साफ करनी चाहिए।
एजेंसिया मोहल्लों में कोई सर्वे कर रही हैं, इसकी जानकारी नहीं है। यह काम परिचित लोगों को करना चाहिए। मोहल्लों में जाने वाले लोग काम को सत्यापित करेंगे तो जनता भी सहयोग करेगी। हर कर्मचारी के पास आईडी होनी चाहिए। इसे दिखवाता हूं। - अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
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