बरेली: राजस्व निरीक्षक का कारनामा... चार लाख की रिश्वत ले ली और पट्टे भी आवंटित नहीं किए

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Edited By Amrit Vichar
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जांच में आंवला तहसील में तैनात राजस्व निरीक्षक इंद्रेश कुमार यादव पर लगे आरोप सत्य पाए गए, विभागीय कार्यवाही की संस्तुति रिपोर्ट डीएम को भेजी गई

बरेली, अमृत विचार। भूमिहीन लोगों को दो बीघा जमीन का पट्टा आवंटित कराने के नाम पर चार लाख रुपये की रिश्वत वसूलने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में तहसील सदर के साथ आंवला तहसील का नाम भी जुड़ गया है। तहसील सदर में तैनात रहे लेखपाल अब (राजस्व निरीक्षक आंवला तहसील) इंद्रेश कुमार यादव पर चार लाख की रिश्वत लेकर भूमि के पट्टे आवंटित नहीं करने की शिकायत मुख्यमंत्री से ऑनलाइन की गई थी।

जांच में राजस्व निरीक्षक पर लगाए आरोप प्रथमदृष्टया सत्य पाए गए। शिकायतकर्ता और राजस्व निरीक्षक के बीच लेनदेन होने की भी पुष्टि हुई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर प्रत्यूष पांडेय ने राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की संस्तुति करते हुए जांच आख्या जिलाधिकारी को भेजी है।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर ने 25 मई को जिलाधिकारी को भेजी जांच आख्या में कहा है कि भारतेंदु सिंह सोनकर निवासी मोहल्ला नेकपुर, छोटी लाइन के पास ने आईजीआरएस के तहत शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने तहसील सदर के तत्कालीन लेखपाल एवं वर्तमान में राजस्व निरीक्षक आंवला तहसील में तैनात इंद्रेश कुमार यादव के विरुद्ध अनुसूचित जाति के भूमिहीन व्यक्तियों को दो बीघा जमीन का पट्टा दिलाने के बदले 4 लाख रुपये मांगे जाने की शिकायत की।

प्रकरण की जांच तहसीलदार सदर से कराई गई। तहसीलदार सदर की जांच आख्या के अनुसार शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि इंद्रेश कुमार यादव से मेरी पहले से जान पहचान थी। मेरे घर आए थे। इन्होंने पिताजी से कहा कि आपके दो बेटे हैं, इन्हें एक एक पट्टा सरकार द्वारा उपलब्ध करा दूंगा जिसमें एक-एक बीघा का दो-दो लाख रुपये खर्चा आएगा।

जब हमने रसीद की बात कही तो इन्होंने कहा पहले पैसा सरकारी खजाने में जमा होगा। उसके बाद रसीद मिलेगी लेकिन आज तक मुझे सरकार के द्वारा कोई भूमि पट्टा नहीं मिला और न ही रसीद दी। कुछ रुपये बैंक द्वारा इंद्रेश को देने की बात कही लेकिन इंद्रेश ने फोन उठाना और घर जाना-जाना भी बंद कर दिया।

शिकायत में राजस्व निरीक्षक इंद्रेश कुमार यादव का स्पष्टीकरण मांगा गया। तब यह बात सामने आई कि शिकायतकर्ता ने शिकायत में न तो कोई शपथ पत्र संलग्न किया है न ही ऐसा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराया, जिससे यह सिद्ध हो सके कि शिकायतकर्ता की शिकायत सही है, लेकिन तथ्यों की सच्चाई जानने के लिए जांच की गई।

बाद में शिकायतकर्ता ने शपथ पत्र प्रस्तुत कर पूर्व में दिए बयान दोहराते हुए 5 मई को इंद्रेश यादव को घर पर 4 लाख रुपये देने की बात कही थी। इस घटना को योगेश व संजीव आदि लोगों ने भी देखा। इंद्रेश ने शपथकर्ता व उसके छोटे भाई से दो-दो फोटो व आधार कार्ड की छाया प्रतियां भी ली थीं। जब 4 लाख रुपये की रसीद मांगी तो उन्होंने टालमटोल कर दिया।

कहा कि आपके नाम पट्टे के साथ आपको रसीद भी दे दी जाएगी। इसके बाद लगातार संपर्क बनाए रखने पर राजस्व निरीक्षक गुमराह करता रहा। इधर, तहसीलदार सदर ने अपनी आख्या में कहा है कि शिकायतकर्ता, राजस्व निरीक्षक के बयान, स्पष्टीकरण और शपथपत्र से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्षों के बीच रुपयों का लेनदेन हुआ है। प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सत्य प्रतीत होते हैं। इंद्रेश यादव राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ किए जाने की आख्या प्रस्तुत की गई है।

राजस्व निरीक्षक ने अपनी सफाई कहा-तीन प्रतिशत ब्याज पर 1.20 लाख लिए थे
राजस्व निरीक्षक इंद्रेश कुमार यादव ने अपने उत्तर में शिकायतकर्ता के शपथ पत्र में दर्ज तथ्यों काे नकारते हुए लिखा है कि शिकायतकर्ता का यह कहना गलत है कि मुझे 4 लाख रुपये घर बुलाकर दिए थे। एक दिन वह अचानक पैसों के जरूरी कार्य में शिकायतकर्ता के फाइनेंस कंपनी इम्पीरियल टॉकिज पहुंचा, वहां पर शिकायतकर्ता व उनके पिता मौजूद थे। मैंने कुछ रुपये इनसे ब्याज पर मांगे तब मुझे 1.20 लाख रुपये का आंध्रा बैंक का चेक दिया जो मेरे द्वारा कैश कराया गया।

इस चेक के बदले में मुझसे 1.20 लाख रुपये की जगह शिकायतकर्ता ने एडवांस ब्याज लगाकर 1.50 लाख का स्टेट बैंक का चेक ले लिया था। शिकायतकर्ता बतौर ब्याज में 18 हजार, 9 हजार और 7 हजार रुपये उससे अपने घर बुलाकर लेते रहे। राजस्व निरीक्षक ने शिकायतकर्ता पर ही 4 लाख रुपये मांगकर ब्लैक मेल करने का आरोप लगाया। उसने 1.20 लाख रुपये शिकायतकर्ता से तीन प्रतिशत ब्याज पर लिए थे। यह भी कहा कि वह शिकायतकर्ता को 1.20 का चेक वापस करने को तैयार है, लेकिन उसका भी 1.50 लाख का चेक वापस दिलाया जाए।

मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव ने कारवाई के लिए लिखा था
आईजीआरएस पर शिकायत हाेने के बाद मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव भूपेंद्र बहादुर सिंह ने 11 अप्रैल को डीएम को नियमानुसार मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने को लिखा था। इसके बाद डीएम शिवाकान्त द्विवेदी ने एसडीएम सदर प्रत्यूष पांडेय को रिश्वत लेने के आरोपों की जांच कराने के निर्देश दिए थे। बाद में एसडीएम सदर के निर्देश पर तहसीलदार सदर ने मामले की जांच की।

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