Odisha Train Accident : उस्ताद बचाएंगे बेपटरी रेल, अब नहीं होगा जिंदगी से खेल
उस्ताद बचाएंगे बेपटरी रेल, अब नहीं होगा जिंदगी से खेल।
विश्व के सबसे सघन और बड़े रेल नेटवर्क भारतीय रेल महकमा तमाम तकनीकों से लैस होने के बाद भी दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 80 प्रतिशत जनसंख्या ट्रेन से सफर करना पसंद करती है।
कानपुर, [महेश शर्मा]। विश्व के सबसे सघन और बड़े रेल नेटवर्क भारतीय रेल महकमा तमाम तकनीकों से लैस होने के बाद भी दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 80 प्रतिशत जनसंख्या ट्रेन से सफर करना पसंद करती है। देखा जाए तो आजकल हर महीने दो-तीन ट्रेन रेलवे में शामिल की जा रही है और यात्रा को सुखद बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पर जब तब हो रही ट्रेन दुर्घटनाओं ने तकनीक को चुनौती दी है।
ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उस्ताद (अंडर गियर सर्विलांस थ्रू आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस असिस्टेड ड्रायड) नामक इक्विपिमेंट विकसित किया जा रहा है जो आर्टिफिशुयल इंटेलीजेंस से खामियों की तरफ इंगित करेगा और इसकी मदद से दुर्घटनाओं में नियंत्रण किया जा सकेगा। हालांकि इसे मार्च 2023 तक उपयोग में लाने का दावा किया गया था पर शायद अबतक पूरा नहीं किया जा सका। सबसे ज्यादा घटनाएं ट्रेनों के बेपटरी होने से होती हैं। उस्ताद को तैयार करने के लिए 250 करोड़ का बजट भी आवंटित किया गया था।
इंजीनियर्स की टीम ने ने छोटे आकार का यह उपकरण बनाया। शक्तिशाली कैमरा के साथ उस्ताद लोहे का भी एक्सरे ले सकेगा। बताया जाता है कि यह सिस्टम इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर से जुड़ा होगा। उस्ताद को चलाने के लिए छोटे-छोटे पहिए लगाए गए हैं। उस्ताद ट्रेन के ऐसे हिस्सों में भी आसानी से पहुंच सकता है जहां खामियों को पकड़ पाना दुष्कर कार्य होता है।
यह इंजन व कोच के नीचे या अंदर भेजा जा सकता है। उस्ताद जहां नहीं पहुंच पाते हैं वहां की फोटो लाकर बता सकते हैं कि खामियां क्या हैं। उस्ताद को कंप्यूटर व रिमोट द्वारा चलाया जा सकता है। उस्ताद के सहारे तकनीकी टीम तकनीकी खामियों को भी ठीक कर सकती है।
एक रेल अधिकारी बताते हैं कि उस्ताद के लिए रिसर्च डिजाइन एंड स्टेंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की स्वीकृत के बाद पिंक बुक (रेलवे को बजट आवंटित करने वाला आदेश रजिस्टर) में 250 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। हालांकि इसके इसी साल मार्च में बनाया जाना था पर खबर के अनुसार काम जारी है। इनके तैयार होने के बाद सभी रेल मंडलों को मुहैया कराया जाएगा।
