2028 ओलंपिक में शीर्ष दस देशों में जगह बनाने का होना चाहिए उद्देश्य: कोविंद
नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन से पहली बार वर्चुअल माध्यम से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि इन पुरस्कार विजेताओं की उपलब्धियां खेलों में भारत की असीम संभावनाओं दर्शाती हैं और हमारा उद्देश्य 2028 ओलंपिक में शीर्ष दस देशों में जगह बनाना होना चाहिए। कोविंद …
नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन से पहली बार वर्चुअल माध्यम से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि इन पुरस्कार विजेताओं की उपलब्धियां खेलों में भारत की असीम संभावनाओं दर्शाती हैं और हमारा उद्देश्य 2028 ओलंपिक में शीर्ष दस देशों में जगह बनाना होना चाहिए।
कोविंद ने आज खेल दिवस के दिन वर्चुअल समारोह से राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार और आजीवन ध्यानचंद पुरस्कार प्रदान किए। राष्ट्रपति ने इस दौरान कहा कि भारत खेलों में एक महान शक्ति के रूप में उभरेगा और इसका उद्देश्य 2028 के ओलंपिक में पदक जीतने के मामले में शीर्ष दस देशों में जगह बनाना है।
उन्होंने बेंगलुरु, पुणे, सोनीपत, चंडीगढ़, कोलकाता, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, भोपाल, हैदराबाद और ईटानगर समेत 11 से अधिक देश के विभिन्न साई खेल केंद्रों के अधिकारियों, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे विश्वास है कि हम यह लक्ष्य हासिल करेंगे।” केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू दिल्ली के विज्ञान भवन से इस समारोह से जुड़े और स्वागत भाषण भी दिया।
कोविंद ने कहा, “कोविड-19 ने खेलों की दुनिया पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। ओलंपिक स्थगित हो गया है। हमारे देश में खेल गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। खिलाड़ी और कोच अभ्यास और प्रतियाेगिताओं के कम हो जाने के कारण कम प्रेरित महसूस कर रहे हैं जो उनकी मानसिक और शारीरिक तैयारी के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।” राष्ट्रपति ने खुशी जताई कि इस चुनौती से उभरने के लिए खिलाड़ी और कोच ऑनलाइन कोचिंग और वेबिनार के माध्यम से जुड़े हुये हैं।
उन्होंने कहा कि आज का यह कार्यक्रम वैश्विक महामारी के बावजूद खेल से जुड़ी गतिविधियों को जारी रखने का एक प्रयास है। कोविंद ने देश में खेलों में बढ़ती विविधताओं को लेकर खुशी जताते हुए कहा कि आज के पुरस्कार विजेता 20 से अधिक खेलों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कबड्डी, खो-खाे और मल्लखंभ जैसे हमारे पारंपरिक खेलों की बढ़ती लोकप्रियता आम लोगों को खेलों से जोड़ने में मदद करेगी।
आज क्रिकेट और फुटबॉल के अलावा वॉलीबॉल और कबड्डी जैसे खेलों के लीग टूर्नामेंट लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं जो कि सुखद बदलाव है। ” राष्ट्रपति ने कहा, “सभी हितधारकों की भागीदारी से खेलों की संस्कृति को बढ़ावा मिल सकता है। यह सरकार की एकमात्र जिम्मेदारी नहीं है।
खेलों में निवेश राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है जिससे समाज मजबूत होता है।” कोविंद ने इस बात पर खुशी जताई कि कई कॉर्पोरेट, गैर सरकारी संगठन और शिक्षण संस्थान खेलों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सामूहिक प्रयासों के माध्यम से खेलों में एक अग्रणी राष्ट्र बनकर उभरेगा।
