अमेठी: लकड़ी और रस्सी के सहारे खंभे से हो रही बिजली आपूर्ति

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Edited By Amrit Vichar
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अमेठी/अमृत विचार। विद्युत उपखण्ड जायस अन्तर्गत पावर हाउस फुरसतगंज के उपभोक्ता अवर अभियंता के हठधर्मिता के कारण परेशान है। अधिकारियों के निर्देश पर भी जेई शिकायत का निस्तारण नहीं करना चाह रहे हैं। दो तीन वर्षों पूर्व की शिकायतों को भी समाधान नहीं करना चाहते है।

कहीं बिजली के खंभे को रस्सी व लकड़ी के सहारे रोककर बिजली की आपूर्ति की जा रही है तो कहीं लो वोल्टेज होने के कारण ग्रामीणों की मांग पर शौभाग्य योजना के तहत लगे ट्रांसफार्मर से बिजली की आपूर्ति नहीं की जा रही है। शिकायतों के निस्तारण के लिए ग्रामीण अधिकारियों के चौखट की परिक्रमा करते-करते थक हार चुके हैं। 

 जायस विद्युत उपखण्ड के पावर हाउस फुरसतगंज में उपभोक्ताओं की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। बताते है कि पावर हाउस का चक्कर लगाते-लगाते थक जाने के बाद भी जेई से संपर्क नहीं हो पाता है। उपभोक्ता अपनी पीड़ा बताने के लिए फोन करते है तो जेई फ़ोन भी उठाना मुनासिब नहीं समझते है।

आलम यह है कि किसी भी समस्या को लेकर पावर हाउस जाने पर उसका निस्तारण नहीं होता है बल्कि वहां मौजूद कर्मियों के शोषण का शिकार अलग से होना पड़ता है। नेशनल हाइवे पर स्थित ओदारी चौराहे पर बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने मो. शोहराब की दुकान के दरवाजे पर बीते माह 23-24 अप्रैल को आई तेज आंधी तूफान में लोहिया बिजली का खम्भा टूट कर लटक गया था।

शिकायत करने पर कई दिन बीतने के बाद किसी ने सुध नहीं ली तो स्थानीय लोगों ने मिलकर उसे रस्सी के सहारे सीधा कर लकड़ी की बल्ली लगाकर खड़ा कर दिया था। कई दिनों तक जेई उदय प्रताप सिंह चौहान ने फोन नहीं उठाया तो अजय कुमार ने 27 अप्रैल को अपने मोबाइल से जेई के मोबाइल पर टेस्ट मैसेज भेजा। उसके बाद जेई ने पलटकर फोन करके अजय से कहा कि क्षेत्र इतना बड़ा है कि सबका जिम्मा हम नहीं ले सकते है। उसके बाद शोहराब सहित दर्जनों लोगों ने इसकी शिकायत 9 मई को एसडीओ रवीश कुमार पांडेय से की।

एसडीओ ने 10 मई को शिकायती पत्र जेई को फारवर्ड कर दी। इधर स्थनीय लोगों पर खतरे का साया मंडरा रहा था। लिखित शिकायत देने के बाद भी समस्या का हल हफ्ते भर बाद भी नहीं निकला तो पीड़ितों ने इसकी शिकायत 17 मई को पुनः एसडीओ से की। फिर वही रवैय्या अपनाकर एसडीओ ने शिकायत को जेई के पास फारवर्ड कर दिया। उसके बाद महीनों बीत गए। बिजली का खम्भा बदलना तो दूर दो महीने बीतने के बाद भी उसे कोई देखने तक नहीं आया।

जेई की इस हठधर्मिता के चलते उपभोक्ताओं में रोष है। वहीं डेढ़ वर्ष पूर्व पूरे अमिया गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने लो वोल्टेज की शिकायत की थी। ग्रामीणों की मांग थी कि गांव के किनारे शौभाग्य योजना के तहत जो ट्रांसफार्मर लगा है उसमें से ग्रामीणों का कनेक्शन कर दिया जाय तो गांव में लो वोल्टेज की समस्या दूर हो जाएगी। जब इसकी सुनवाई जेई ने नहीं की तो ग्रामीणों ने समस्या से निजात पाने के लिए आइजीआरएस पर इसकी शिकायत कर दी।

जेई ने समस्या को निस्तारण करने के बजाय और उलझा दिया और रिपोर्ट लगा दी कि इस्टीमेट के लिए शासन को भेजा गया हैं। डेढ़ वर्ष इस्टीमेट को भेजे हुए हो गया लेकिन ग्रामीणों को लो वोल्टेज से निजात दिलाने के लिए न कोई जतन की गई और न ही इस्टीमेट बनकर आया। इस उमस भरी गर्मी में ग्रामीण लो वोल्टेज की वजह से परेशान दिख रहे है। जबकि शौभाग्य योजना स लगा ट्रांसफार्मर आज भी जस के तस धरा शोपीस बना हुआ है।

शिकायतों के निस्तारण को लेकर बराबर जेई से कहा जाता है, लेकिन जेई अपने के आगे किसी की नहीं सुनता है, कई बार फटकार भी लगाई गई है, जेई को मनमाने तरीके से काम करने की शिकायत लगातार मिल रही है, विकल्प तलाशा जाएगा...सत्येंद्र पांडे अधिशाषी अभियंता सर्किल तिलोई।

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