बरेली: श्रमदान से तालाब का जीर्णोद्धार, दूर तक पहुंच रही विकल्प संस्था की गूंज
क्यारा ब्लाक के सहसिया गांव में 1 जून को शुरू किया अभियान हर रोज पकड़ रहा गति
फोटो- तालाब में श्रमदान करते विकल्प संस्था के पदाधिकारी व बच्चे।
बरेली, अमृत विचार। क्यारा ब्लाक के सहसिया गांव में तालाब खोदाई के लिए विकल्प संस्था के अभियान की गूंज दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई राज्यों तक पहुंच रही है। दूसरे शहरों से लोग तालाब की खोदाई के अभियान में श्रमदान कर चुके हैं।
सामाजिक एवं जल संरक्षण कार्यकर्ता राज नारायण ने बताया कि महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की कल्पना को धरातल पर लाने के लिए साल 2012 में सहसिया गांव को संस्था ने अपना कार्यक्षेत्र बनाया था। उस दौरान पता चला कि गांव में तालाब बरसात में भरने के बावजूद दिसंबर में सूख जाता है। मई-जून में पशु पक्षियों और ग्रामीणों को सबसे अधिक दिक्कत होती है।
लिहाजा, इस तालाब को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया और 2016 में मई-जून के महीने में 40 दिन लगातार तालाब के खोदाई की। जब जून के आखिर तक तालाब में पानी समाप्त नहीं हुआ तो लगातार तीन साल तालाब पर श्रमदान किया। पिछले वर्ष इसी गांव के एक दूसरे स्थान पर नया तालाब बनाने का संकल्प लिया लेकिन बारिश कम होने के कारण इसमें पानी नहीं है। इस बार फिर गहरी खोदाई की। यहां तालाब भी लगभग तैयार हो चुका है। बारिश में पानी भरने पर यह कभी नहीं सूखेगा।
सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ रहा कारवां
राज नारायण ने बताया कि विकल्प संस्था के सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम की गूंज सोशल मीडिया पर भी खूब छाई है। श्रमदान के लिए दूरदराज के लोगों का कारवां बढ़ता जा रहा है। कुछ दिन पहले मुंबई से साहित्यकार एवं समाजसेवी उर्मिला सिंह ने श्रमदान यज्ञ में अपनी आहुति दी थी। दिल्ली की पर्यावरण एक्टिविस्ट सिया, राजस्थान साहित्य परिषद की सदस्य सरिता भारती, अजमेर से डाॅ. संतोष भी श्रमदान करने के लिए बरेली आ चुकी हैं।
इसके अलावा बरेली से केसीएमटी के डीन डाॅ. रविजीत सिंह, राममूर्ति इंजीनियरिंग कॉलेज से प्रवक्ता एवं प्रसिद्ध फोटो आर्टिस्ट डाॅ. पंकज अग्रवाल, जीजीआईसी की पूर्व प्रधानाचार्य पशु प्रेमी डॉ. निरुपमा शर्मा, पूर्व शिक्षिका रजनी पांडे, बीएसए से निशा, नरेंद्र पाल, कवि उपमेंद्र सक्सेना, जगदीश, जीआईसी के पूर्व प्रधानाचार्य लक्ष्मी नारायण एवं उनकी पत्नी गायत्री शर्मा, पवन जयकर, मनोज गुप्ता, ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष गजेंद्र पांडे भी समय-समय पर श्रमदान के लिए पहुंचे।
अभी नहीं संभले तो बूंद-बूंद पानी को तरसेंगी पीढ़ियां
राज नारायण का कहना है कि जलसंरक्षण पर ध्यान नहीं देने के कारण ही लगातार भू-जलस्तर गिर रहा है। ऐसे में यदि जल संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगी।
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