शाहजहांपुर; बेसहारा पशु अपनाइए सरकार से हर माह 930 रुपये पाइए, इस योजना बारे में जानिए
शाहजहांपुर अमृत विचार। बेसहारा पशुओं के संरक्षण के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना शुरू की है। योजना के तहत पशुओं को गोशाला से लेकर पालने वाले को प्रतिमाह 930 रुपये सरकार की ओर से दिए जाएंगे। हालांकि जानकारी के अभाव में ज्यादा लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पशु पालन विभाग की गोशालाओं में अब भी छह हजार 216 पशु हैं।
बेसहारा गायों के संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया था। बीते वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि राज्य में किसी भी गोवंश पशु को बेसहारा नहीं रहने दिया जाएगा। सरकार उनके पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कोई भी गोवंश छुट्टा न घूमे। कहा था कि चरणबद्ध रूप से सभी जिलों में इसी तरह बेसहारा गोवंशों का बेहतर प्रबंधन किया जाए। इस आदेश का पालन बीते दिनों शुरू हो गया। योजना धरातल पर उतर आई। गोशाला से पशु को लेने वालों को अब प्रतिमाह सरकार की ओर से 930 रुपये दिए जा रहे हैं।
शालाओं में पल रहे 6216 पशु
जिले में सरकार की ओर से बेसहारा गोवंश के लिए गोशाला और नंदी शालाएं खोली गई हैं। इनमें इस समय छह हजार 216 पशुओं को संरक्षित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बेसहारा पशुओं के चारे-भूसे के लिए भी जरूरी इंतजाम किए हैं। इसके बाद भी बेसहारा पशुओं की संख्या जिले में कम नहीं हो रही है।
बेसहारा पशु गांवों के साथ-साथ शहर में भी भारी संख्या में घूम रहे हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी लोगों को बेसहारा पशुओं से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। कई बार दो पहिया वाहन सवार इनसे टकरा कर चोटिल भी हो चुके हैं। कई बार पशु लोगों पर हमला भी कर देते हैं। पशुओं के पास से गुजरते हुए लोगों को यही खतरा सताता रहता है कि कहीं पशु उन पर हमला न कर दे।
पशुओं के लिए ब्लेड वाले तार बने जानलेवा
जिले में ब्लेड वाले तार पशुओं के लिए लगातार जानलेवा बन रहे हैं। अब तक पांच पशुओं की जान इन तारों से जा चुकी है। इसके बाद भी इस दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खेतों में लगाए गए ब्लेड वाले तार में फंस कर पशु बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं। कई बार वह चलने फिरने में असमर्थ हो जाते हैं और आगे चलकर उनकी जान चली जाती है।
जिले में अब तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी ब्लेड वाले तार पर अंकुश नहीं लग सका है। किसानों का कहना है कि पशु रस्सी व साधारण तार लगाने के बाद भी खेतों में घुस जाते हैं और फसलों को नुकसान करते हैं। कुछ जगहों पर किसान पशुओं के पास जाने से भी डरते हैं। ऐसे में मजबूरी के चलते वह ब्लेड वाले तार खेतों में लगा रहे हैं।
सरकार की ओर से पशु पालकों के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना चलाई जा रही है। अगर कोई गोशाला से पशु लेकर पालता है तो उसे हर महीने 930 रुपये खर्च के लिए दिए जाएंगे---डॉ. जय प्रकाश, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
यह भी पढ़ें- शाहजहांपुर: करंट लगने से युवक की मौत, पिता झुलसा, मचा कोहराम
