Sawan 2023 : Fatehpur में हर हर महादेव के उद्घोष से गूंजे शिवालय, घाटों पर मुस्तैद रहा प्रशासन
फतेहपुर में हर हर महादेव के उद्घोष से गूंजे शिवालय।
फतेहपुर में हर हर महादेव के उद्घोष से शिवालय गूंजे। भोर पहर से ही शंकर शंभू की पूजा को भक्तों का सैलाब जुटने लग गया। गंगा स्नान के महत्व को देखते घाटों का जायजा लेता प्रशासन नजर आया।
फतेहपुर, अमृत विचार। सावन के पहले सोमवार शिवालयों में शिवभक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। भोर पहर से ही सिद्धपीठों के घंटे घड़ियाल व शंखनाद गूंजने लगे। धूप, अगरबत्ती व हवन की सुगंध से दोआबा की धरा महक उठी। कावड़ियों ने गंगा जल लाकर जलाभिषेक किया। शिवलिंग में बेलपत्र, दूध, धतूरा चढ़ाकर भोले भंडारी की आराधना की गई।
भगवान भोलेनाथ का प्रिय सावन का महीना शुरू हो चुका है। पहला सावन का सोमवार उल्लास व उत्साह का गवाह बना नजर आया। शिवालयों में तड़के से ही हर हर महादेव व ओम जय शिवकारा की गूंज सुनने को मिलती रही। शहर के तांबेश्वर मंदिर में सारा दिन दर्शन को भक्त उमड़ते रहे। महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग अलग कतारों की व्यवस्था की गई। ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैल सके। यहां पर फोर्स की तैनाती रही।
साथ ही दर्शनार्थियों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने फुटपाथ की दुकानें हटवा कर पूजा को सहज करने का काम किया। इसी तरह थवई के थवईश्वर मंदिर व चांदपुर के गूढ़ेश्वर मंदिर में भी शिवभक्तों का सैलाब दिखाई दिया। कावड़ के साथ जलाभिषेक को आए शिव भक्तों का जगह जगह स्वागत भी किया गया।
अरगलेश्वर मंदिर में माथा टेककर मांगी मन्नतें
तहसील क्षेत्र में सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में भक्तों द्वारा शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना की जाने लगी। सावन के पहले सोमवार को भक्तों ने शिव आराधना कर वरदान मांगा।
अमौली क्षेत्र के अर्गलेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ दिखाई पड़ी। हालांकि इस मंदिर का इतिहास तो किसी को नहीं पता है लेकिन किवदंती के अनुसार बताया जाता है कि इस मंदिर में एक गाय के द्वारा एक निश्चित स्थान पर खड़े होकर अपने दूध का अवतरण करने का संदर्भ मिलता है। गांव के पास के ही रहने वाले एक व्यक्ति की गाय जंगल में जब रोज चरने के लिए आती थी। चरवाहा शाम को जब गाय को लेकर वापस जाता था। गाय के मालिक को जब दूध नहीं मिलता था तो वह चरवाहे पर शक करते हुए कहता था कि तुमने मेरी गाय का दूध निकाल लिया है। चरवाहे द्वारा इस बात को इनकार करते हुए गाय की गतिविधि को देखने का प्रयास जारी रखा। एक दिन चरवाहे ने देखा गया कि गाय एक निश्चित स्थान पर खड़े होकर अपने दूध को गिरा देती है। तब चरवाहे ने गाय के मालिक से यह बात बताई मालिक भी इस चरवाहे की कहानी पर विश्वास ना करते हुए गाय की गतिविधि को देखने में लग गया। उसने देखा कि गाय एक निश्चित स्थान पर अपने दूध को गिरा रही है तभी गाय के मालिक ने उस स्थान को खोदना चालू किया तब वहां पर एक शिवलिंग दिखाई पड़ा। उस शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया गया और वह शिवलिंग नहीं निकला तो लोगों ने वहीं पर इस मंदिर का निर्माण करा दिया। बताया जाता है कि इस मंदिर में आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है और जिन भक्तों की मनोकामना पूरी होती है वही भक्त मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए कुछ ना कुछ सहयोग करते रहते हैं।
निराश नहीं करते डूंडेश्वर बाबा
बिंदकी नगर के पुरानी बिंदकी स्थित डुण्डेस्वर धाम में सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लग गई। ऐसी मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु डुण्डे स्वर मन्दिर में सच्चे मन से जो भक्त मन्नत मांगता है। भगवान भोले उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। हालांकि डुण्डेस्वर धाम में यूं तो पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है लेकिन सावन महीने में इसका अलग महत्व है खासकर सावन के सोमवार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जाती है पूजा-अर्चना भी की जाती है भगवान उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं।
