बरेली: इन्वेस्टर समिट में नए निवेश की उम्मीदों पर फिरा पानी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। राज्य सरकार ने ढाई साल पहले औद्योगीकरण की रफ्तार तेज करने पर जोर देते हुए लखनऊ में इन्वेस्टर समिट आयोजित की थी। इसमें प्रदेश के प्रमुख उद्यमी और कारोबारी बुलाए गए। जिले के उद्यमियों को भी बड़े प्रोजेक्ट पर काम होने की आस जगी थी। यहां से भी तीन बड़े प्रोजेक्ट बनाकर …

बरेली, अमृत विचार। राज्य सरकार ने ढाई साल पहले औद्योगीकरण की रफ्तार तेज करने पर जोर देते हुए लखनऊ में इन्वेस्टर समिट आयोजित की थी। इसमें प्रदेश के प्रमुख उद्यमी और कारोबारी बुलाए गए। जिले के उद्यमियों को भी बड़े प्रोजेक्ट पर काम होने की आस जगी थी। यहां से भी तीन बड़े प्रोजेक्ट बनाकर शासन तक भेजे गए, मगर कोरोना और लाकडाउन के कारण धरातल पर इनका क्रियान्वयन होने से पहले से सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं।

इससे अधिकांश बड़े निवेशकों को हाथ पीछे खींचने पड़े। नतीजा यह निकला तीन साल पहले हम जहां थे, आज भी वहीं खड़े हैं। सरकार की नीतियों से निवेशकों में हताशा का माहौल है। उद्यमियों का कहना है सरकार की घोषणाओं पर यकीन कर प्रोजेक्ट तैयार किए गए। इनमें सिस्टम ने ऐसा पेच फंसाया कि उन्हें न पुरानी योजनाओं का फायदा मिला न ही नई नीति काम आई। इससे नए निवेश की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

700 करोड़ से अधिक के अनुबंध हुए थे इन्वेस्टर समिट में
इन्वेस्टर समिट में जिले से कुल 28 निवेशकों ने 766 करोड़ के प्रोजेक्ट के प्रस्ताव रखे थे। कारोबारियों को अनुबंध पत्र भी दिए गए। इससे निवेशक काफी खुश थे। वह जमीन और बैंक से धन का इंतजाम कर प्रोजेक्ट तैयार करने में जुट गए। इसमें तेल, स्टोन, पैकेजिंग उद्योग से जुड़े 25 निवेशकों ने तो अपना बेड़ा पार कर लिया। लेकिन 128 करोड़ के पेपर प्लांट, फूड प्रोसेसिंग समेत तीन प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले गए। बताते हैं कि इनमें कुछ प्रोजेक्टों को जमीन की किल्लत के चलते मंजूरी नहीं मिली। फिलहाल मामला जो भी हो, इन तीन निवेशकों को खासी हताशा हाथ लगी है। इनका कहना है प्रोजेक्टों का क्या हुआ, इसकी सटीक जानकारी नहीं दी गई। इधर, जो कारोबारी उद्योग खड़ा करने में कामयाब हो गया, उन पर जीएसटी की मार तो पड़ी ही, बैंकों ने ब्याज पर ब्याज लगाकर उनक कमर तोड़ दी।

“इन्वेस्टर समिट में मेरा 40 करोड़ का प्रोजेक्ट तो शामिल किया था, मगर इतने चक्कर लगाने के बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ। मेरे पेपर प्लांट समेत तीन प्रोजेक्ट से जनपद को एक बड़ी उपलब्धि मिलती, मगर सरकारी स्तर पर उसे तरजीह नहीं दी गई। यहां तक की प्रोजेक्ट का क्या हुआ, मुझे इसकी ठीक से स्थिति तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।”– दिनेश गोयल, उद्यमी

“इन्वेस्टर समिट में जनपद से कुल 28 निवेशकों ने 766 करोड़ के प्रोजेक्ट के प्रस्ताव रखे थे। इनमें 25 निवेशकों के प्रोजेक्टों को मंजूरी मिल चुकी है। शेष प्रोजेक्ट किसी न किसी कमी की वजह से अधूरे पड़े हैं। उद्यमियों से इस संबंध में वार्ता की जा रही है।”- आरआर गोयल, उपायुक्त उद्योग

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