Kanpur: GSVM के डॉक्टरों ने किया परीक्षण, केटामिन दवा के सेवन से खुदकुशी का विचार होगा खत्म, अब तक इतने मरीजों को बचाया

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केटामिन दवा से खत्म हुआ खुदकुशी का ख्याल।

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष ने केटामिन दवा बनाई। यह दवा खाने के बाद मन में खुदकुशी का ख्याल खत्म हो जाएगा। अब तक शोध कर उन्होंने आधा दर्जन मरीजों को स्वस्थ किया।

कानपुर, अमृत विचार। काम का अत्याधिक बोझ, घर की परेशानी, किसी से मनमुटाव या अवसाद जैसे कारणों से लोगों के मन में खुदकुशी का ख्याल आने लगते हैं। यहां तक कि वह एक दो बार खुदकुशी का प्रयास भी कर चुके होते हैं, लेकिन परिजनों की सतर्कता से बच जाते हैं। ऐसे लोगों के मन की अवस्था को बदलने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभाग के डॉक्टरों ने शोध किया। इसमें निष्कर्ष निकला कि मरीज को केटामिन दवा के सेवन से काफी आराम मिलता है। इस दवा के प्रयोग से उसके मन में आत्महत्या का विचार धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।  

शहर में प्रतिदिन एक या दो लोग खुदकुशी कर जिंदगी को अलविदा कह देते हैं, जिसके पीछे तनाव, अवसाद, छोटी या बड़ी परेशानी कारण होते हैं। ऐसे लोगों को बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने टीम के साथ छह लोगों पर शोध किया। यह छह लोग आत्महत्या की कोशिश कर चुके थे।

इनको परिजन हैलट में दिखाने लाए थे। विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी के मुताबिक इन छह लोगों को केटामिन दवा दी गई। यह दवा दो हफ्ते में काम कर गई। लेकिन एक किशोरी को यह दवा चार हफ्ते तक देनी पड़ी। इसके बाद इन सभी छह लोगों के मन से खुदकुशी करने का विचार हट गया और उन्हें जिंदगी पहले से काफी अच्छी महसूस होने लगी। चिकित्सकों के मुताबिक अब यह दवा अन्य मरीजों को भी दी जाएगी, जो खुदकुशी की सोच रखते हैं। 

दवा से शरीर की नसों को मिलता आराम 

डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि केटामिन दवा का प्रयोग बेहोशी के लिए किया जाता था, लेकिन इसे अब अवसाद ग्रस्त और खुदकुशी का मन में विचार बनाने वाले लोगों को भी दिया जाएगा। यह दवा एक गिलास पानी में दवा की निर्धारित मात्रा मिलाकर मरीज को दी जाती है, इसे मरीज को 40 मिनट के अंतराल में रुक-रुककर पीना होता है। जब दवा धीरे-धीरे शरीर के अंदर जाती है तो हर नस को आराम मिलता है और मन शांत हो जाता है। जब मरीज पूरी तरह से शांत अवस्था में आता है तो उसके मन से फिर आत्महत्या करने की सोच निकल जाती है।

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