Kanpur News : पनकी नहर का पानी पीने के लायक नहीं, 10 लाख लोग पीते है, जानें- इसकी वजह
कानपुर में पनकी नहर का पीने योग्य नहीं है।
कानपुर में पनकी नहर का पानी योग्य तक नहीं है। जलकल द्वारा की गई पानी की जांच में सामने आया है।
कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। पनकी कैनाल का पानी भी पीने योग्य नहीं बचा है। कैनाल के पानी की जांच में मानक से अधिक क्षारीयता और टीडीएस मिली है। वहीं, नहर में लगातार फीकल (मल) भी प्रवाहित किया जा रहा है। जिसकी उपस्थिति से जलकल के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। पानी को ट्रीट करने के बाद भी इन पानी की अशुद्धियों को पूर्णतया नष्ट नहीं किया जा पा रहा है। जिसके बाद अब अधिकारियों ने दो बार पानी को ट्रीट करने का फैसला लिया है।
जलकल विभाग की जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार कैनाल का पानी पूरी तरह प्रदूषित मिला है। कैनाल के नमूने लेने पर पानी में टीडीएस की मात्रा 300 मिलीग्राम (प्रति लीटर) से अधिक 360 मिली है। पानी में फ्लोराइड, ऑयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम की अधिक मौजूदगी ने पानी की कठोरता बढ़ा दी है। वहीं, पानी में पीएच वैल्यू (क्षारीयता) 4.0 मिली है। शुद्ध पानी में यह क्षारीयता 7 होनी जरूरी होती है।
वहीं, नहर के पानी में फीकल (मल) भी बहाया जा रहा है। हांलाकि, जलकल अधिकारियों के बरसात में पानी बढ़ने की वजह से भी कई बार अशुद्धियां बहकर आ जाती हैं। जलकल जीएम पीके आनंद ने बताया कि पानी की अशुद्धियों को दूर करके ही पानी आगे सप्लाई किया जा रहा है। बरसात में मल बहकर आ जाता है। जिससे यह समस्या होती है।
कैनाल से जलकल पहुंचता है पानी
निचली गंग नहर से बेनाझाबर 50 एमएलडी और गुजैनी वाटर वर्क्स को 28.5 एलएलडी पानी की सप्लाई जाती है। जिसके बाद यहां से ट्रीट होकर पानी दक्षिण के साकेत नगर, निराला नगर, बर्रा दो से बर्रा आठ तक, गोविंद नगर, उस्मानपुर के साथ उत्तर के काकादेव, सर्वोदय नगर, शास्त्री चौक, शारदानगर, गीता नगर, में सप्लाई होती है। कैनाल से कुल 10 लाख लोगों को पानी जाता है।
यह भी जानें :::::
- प्रति लीटर पानी में टीडीए की मात्रा 300 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए। पानी में फ्लोराइड, ऑयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम की एक लिमटेड मात्रा ही होनी चाहिए। इनकी ज्यादा मात्रा से पानी में कठोरता बढ़ती है। भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार यह किसी भी स्थिति में 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- शुद्ध पानी का पीएच 7 होना चाहिए। अगर यह कम होता है तो पानी अम्ल की अधिकता वाला और 7 से अधिक होता है तो पानी क्षार गुणों वाला होता है। स्नायु एवं मज्जा के पोषण हेतु शरीर में अम्ल तत्व की बहुत कम मात्रा की आवश्यकता होती है। रक्त में आवश्यकता से अधिक अम्ल होने से रक्त विषाक्त बन अनेक रोगों का कारण बन जाता है।
