संभल: हैदराबाद के आंदोलन में सात माह की काटी थी जेल
धुरेंद्र शास्त्री के भाषण से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाशंकर चौधरी में जगी थी क्रांति की ज्वाला
संभल/चन्दौसी, अमृत विचार। भारत देश आजादी की 76वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। देशवासियों का रोम-रोम आजादी के जश्न में डूबा नजर आ रहा है। वहीं लोग आजादी की जंग में अपना योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं। नगर के सुभाष रोड निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. दयाशंकर चौधरी और मोहल्ला गोलागंज निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जगदीश नारायण सक्सेना द्वारा आजादी की जंग में दिए गए योगदान की याद ताजा कर रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाशंकर चौधरी ने हैदराबाद के आंदोलन में सात माह की जेल काटी थी और आंदोलन में हैदराबाद जाने के लिए कोट में लगे सोने के बटन बेचे थे।
- उसी रात ट्रेन से नागपुर के लिए हो गए थे रवाना, पैसे न होने पर इलाहाबाद में बेचे थे सोने के बटन
सुभाष रोड निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. दयाशंकर चौधरी का जन्म 23 सितंबर 1914 थे। सौ वर्ष की आयु में 27 मार्च 2013 को निधन हुआ था। उन्हें उनके आवास पर सलामी से अंतिम विदाई दी गई थी। चार बेटे हैं। दूसरे नंबर के बेटे सुभाष चौधरी ने बताया कि पिता जी व्यापार करते थे। 1937-38 में हैदराबाद मे आंदोलन चला था। सन् 1937 में हैदराबाद आंदोलन के मोर्चा डिटेक्टर धुरेंद्र शास्त्री चन्दौसी आए थे और जनसभा को संबोधित किया।
तब 24 वर्षीय दयाशंकर चौधरी उनके भाषण से काफी प्रभावित हुए और उसी रात परिवार में बिना बताए ही हैदराबाद आंदोलन में शामिल होने के लिए ट्रेन से नागपुर के लिए रवाना हो गए। जेब में पैसे भी नहीं थे। जिससे इलाहाबाद में अपने कोट में लगे सोने के बटन बेच कर किसी तरह काम चलाया और नागरपुर पहुंच कर आंदोलनकारियों से मिले।
फिर आंदोलन कारियों के साथ हैदराबाद पहुंचे। ये आंदोलन ब्रिटिश सरकार द्वारा सरकारी दफ्तरों में तुर्की टोपी पहन कर आने के फरमान के विरोध में था। हैदराबाद में दयाशंकर चौधरी ने सात माह की जेल काटी थी। इसके बाद वह देश को आजादी दिलाने के लिए क्रांतिकारियों के साथ हो लिए और देश को आजाद कराने में क्रांतिकारियों के साथ योगदान दिया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी आए थे चन्दौसी
चन्दौसी, अमृत विचार। हैदराबाद में तुर्की टोपी पहन कर सरकारी दफ्तरों में आने के ब्रिटिश सरकार के फरमान के विरोध में किए गए आंदोलन में सात माह की जेल काटने के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दयाशंकर चौधरी के रोम-रोम में देश भक्ति समा गई। हैदराबाद का आंदोलन सन् 1938 तक चला। जेल से छूटने के बाद वह भारत छोड़ो आंदोलन में कूद गए। सन् 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी चन्दौसी आए थे और आंदोलनकारियों के काफिले के साथ यहां से गुजर रहे थे। उस समय दयाशंकर चौधरी की गांधी जी के संपर्क में आए और उनके काफिले के साथ ही चले गए थे। इसके बाद गांधी जी के साथ लाल बहादुर शास्त्री समेत अन्य क्रांतिकारियों से मुलाकात हुई।
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