बरेली: किसानों को झूठा दिलासा, शासन को फर्जी रिपोर्ट, बस इतना ही कर रहे हैं अफसर
आईजीआरएस पर हर महीने दर्ज होने वाली सैकड़ों शिकायतें बता रही हैं अफसरों के दावों का सच
बरेली, अमृत विचार। छुट्टा पशुओं के कारण किसानों को जो दिक्कतें हो रही हैं, अफसरशाही उनसे तो बेपरवाह है ही, मुख्यमंत्री और सरकार को तक गुमराह कर रही है। मुख्यमंत्री की निगरानी में रहने वाले आईजीआरएस पोर्टल पर छुट्टा पशुओं का फर्जी निस्तारण किया जा रहा है।
हाल ही में पशु पालन विभाग की ओर से भी शासन को भेजी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जिले में एक भी छुट्टा पशु नहीं बचा है। बृहस्पतिवार को सिरौली इलाके के किसानों ने कुछ ही देर में सैकड़ों पशुओं को सड़क पर इकट्ठा कर पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की आंखों के सामने खुलासा कर दिया कि उन्हीं के इलाके में अफसर किस हद तक फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।
किसानों के लिए छुट्टा पशुओं का संकट सारी हदें पार कर गया है। आईजीआरएस पर हर महीने की जाने वाली बेशुमार शिकायतें इसकी साफ तौर पर पुष्टि कर रही हैं लेकिन फिर भी जिम्मेदार अफसर उच्चाधिकारियों से लेकर सरकार तक फर्जी रिपोर्टिंग करने में जुटे हैं।
अफसरशाही अच्छी तरह जानती है कि छुट्टा पशुओं की समस्या किस कदर विकराल हो चुकी है लेकिन इसके निदान का कोई रास्ता न सूझने के कारण उसने भी आंखें मूंद ली हैं। आईजीआरएस की शिकायतों के जवाब में ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड की जा रही है कि छुट्टा पशुओं को गोशाला में भिजवाकर समस्या निस्तारित कर दी गई है लेकिन असल में ऐसा कहीं कुछ नहीं हो रहा है।
इस महीने 14 अगस्त तक आईजीआरएस पर छुट्टा पशुओं के संबंध में 100 शिकायतें की गई हैं जिनमें से अधिकारियों ने आठ को आंशिक और 40 को पूरी तरह निस्तारित करने की रिपोर्ट आईजीआरएस पर अपलोड की है। सरकारी आंकड़ों में ही 39 शिकायतें लंबित और एक डिफाल्टर श्रेणी में है। आईजीआरएस पर हर महीने सैकड़ों शिकायतों के निस्तारण के दावों के बावजूद असलियत यही है कि लोगों को छुट्टा पशुओं से निजात नहीं मिल पा रही है।
अफसरों के आदेश ही बता रहे हैं सच नहीं है शासन को भेजी गई रिपोर्ट
छुट्टा पशुओं का मामला भी अफसरशाही में अजीब विरोधाभास में फंसा हुआ है। कोई अफसर जिले में छुट्टा पशु न होने का दावा कर रहा है तो कोई मातहतों को उनसे निजात दिलाने का आदेश जारी कर रहा है।
हाल ही में मीरगंज के एसडीएम उदित पवार ने तहसील क्षेत्र की नगर पंचायतों में छुट्टा पशुओं की भरमार का जिक्र करते हुए फतेहगंज पश्चिमी और शेरगढ़ के खंड विकास अधिकारी और शाही नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को आदेश जारी किया था कि छुट्टा पशुओं को गोशाला पहुंचाया जाए, जबकि पशुपालन विभाग जून में ही कहीं छुट्टा पशु न होने की रिपोर्ट शासन को भेज चुका है। आंवला क्षेत्र में कई बार छुट्टा पशुओं के मामले पशुधन मंत्री के दरबार में पहुंच चुके हैं।
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