Flood In Kanpur: कटरी गांवों में घुसे पानी से बढ़ा बीमारी का खतरा, अभी दो दिन उफान में रहेगी गंगा

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के कटरी गांवों में घुसे पानी से बीमारी का खतरा बढ़ा।

कानपुर के कटरी गांवों में घुसे पानी से बीमारी का खतरा बढ़ा। बच्चों के शरीर पर चकत्ते पड़ने लगे है। आपदा प्रबंधन ने लंच पैकेट वितरित किए।

कानपुर, अमृत विचार। गंगा का जलस्तर चौथे दिन भी कम नहीं हुआ। खतरे के निशान को पार कर चुकी गंगा अब कटरी से जुड़े गांवों की बड़ी मुसीबत बन गई है। कटान शुरू होने से हादसों का भी खतरा बढ़ गया है। चार गांवों में पानी मकानों के अंदर तक पहुंच चुका है। गंदगी होने से बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है। बच्चों के चकत्ते की समस्या आने लगी है। आपदा प्रबंधन और बाढ़ चौकियों की टीमों ने गांवों में जाकर ग्रामीणों को खाने के पैकेट वितरित किए। वहीं, दवा का छिड़काव कराया गया है। अभी दो से तीन दिन राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 

बैराज में कटरी से जुड़े चैनपुरवा और भोपाल का पुरवा गांव में पानी भरे होने की वजह से वहां पर आवागमन बंद हो गया है। बच्चे और महिलाओं को मकान की छतों में दिन और रात गुजारनी पड़ रही हैं। यही हाल ख्यौरा कटरी के भगवानदीनपुरवा का है। वहां का सड़क संपर्क मार टूट गया है। ग्रामीणों को अब प्रशासनिक मदद का ही सहारा रह गया है, क्योंकि जिस दिन से गांवों में पानी भरा है। वहां के घरों में चूल्हा नहीं जला है।

आपदा प्रबंधन की टीम ही इन गांवों में खाना का पैकेट बंटवा रही है। कुछ ग्रामीणों ने अपने बच्चों और घर के बुजुर्गों को रिश्तेदारों को घर भेज दिया है। वे घर की रखवाली के लिए गांव में रुके हैं। इधर, बैराज पर गंगा अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।

पानी का प्रेशर कम करने के लिए बैराज से करीब चार लाख क्यूसेक पानी शुक्लागंज की ओर छोड़ा गया, लेकिन इसके बाद भी जलस्तर में कोई खास कमी नहीं आई। वहीं, शुक्लागंज में भी गंगा चेतवानी बिंदु को पार कर चुकी है। वहां पर भी कटरी से जुड़े गांवों में पानी पहुंच गया है। 

बच्चों के शरीर पर चकत्ते पड़ने लगे हैं

जलभराव से गांवों में बीमारी का खतरा बढ़ गया है। बच्चों के शरीर में चकत्तों की समस्या आने लगी है। मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर दवा दी है। आपदा प्रबंधन की टीम ने गांव में साफ-सफाई कराने के साथ ही दवा का छिड़काव कराया है। 

अभी राहत की उम्मीद नहीं है

नरौरा और हरिद्वार से सोमवार को अपेक्षाकृत कम पानी छोड़ा गया है, लेकिन इससे अभी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। नरौरा और हरिद्वार से औसतन चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, लेकिन सोमवार को ढाई लाख क्यूसेक से भी कम पानी छोड़ा गया। इसके बावजूद अभी राहत की उम्मीद नहीं है। बैराज के पंप आपरेटर उमेश पाल के मुताबिक पानी जरूर कम छोड़ा गया है, लेकिन इसका असर दो दिन बाद पता चलेगा। अभी दो दिन गंगा खतरे के निशान के ऊपर ही रहेगी। 

114.560 मीटर बैराज पर अपस्ट्रीम
114.360 मीटर बैराज पर डाउनस्ट्रीम
399751 क्यूसेक पानी बैराज से छोड़ा गया
113.030 मीटर शुक्लागंज गेट
155238 क्यूसेक पानी नरौरा डेम से छोड़ा गया
84165 क्यूसेक पानी हरिद्वार से छोड़ा गया

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