एनजीटी के खिलाफ याचिका अनुच्छेद 226 के तहत सुनवाई योग्य : High Court
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ याचिका सुनवाई योग्य है। मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मैसर्स होटल द ग्रैंड तुलसी व 15 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 22 में ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अदालत में अपील का प्रावधान है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा की शक्ति को धारा 22 द्वारा समाप्त नहीं किया गया है। दरअसल मौजूदा मामले में गाजियाबाद के 122 होटलों द्वारा अवैध रूप से भूजल निकाले जाने को लेकर एनजीटी के समक्ष अर्जी दाखिल की गई थी। एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया था कि क्षेत्र के अधिकांश होटल नगर निगम अधिकारियों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना भूजल का उपयोग कर रहे थे। इस पर एनजीटी ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को होटल पर जुर्माना लगाने का निर्देश दिया। याची होटलों ने इस आधार पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि उन्हें बिना सुने ही भारी मात्रा में जुर्माने का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा एनजीटी प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा जारी आदेश को रद्द करने की मांग भी की गई।
अंत में कोर्ट ने एनजीटी के आदेश के खिलाफ याचिका को सुनवाई योग्य माना, साथ ही याचियों को किसी भी राहत के लिए संयुक्त समिति से संपर्क करने का निर्देश दिया।
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