बरेली: वेंडरों की हड़ताल से नहीं बिके चार करोड़ के स्टांप, सैकड़ों रजिस्ट्रियां भी नहीं हुईं

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Edited By Amrit Vichar
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 सभी तहसीलों में 400 से अधिक वेंडर रहे हड़ताल पर

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बरेली, अमृत विचार। स्टांप बिक्री के कमीशन में हुई कटौती समेत कई मांगों को लेकर ऑल यूपी स्टांप वेंडर्स एसोसिएशन की प्रदेश व्यापी हड़ताल का असर जिले में भी पड़ा। बरेली, नवाबगंज, फरीदपुर, आंवला, मीरगंज और बहेड़ी तहसील में चार सौ से अधिक वेंडरों के हड़ताल पर रहने से करीब चार करोड़ के स्टांप नहीं बिके। इसकी वजह से सैकड़ों रजिस्ट्रियां नहीं हुई, जिससे राजस्व का भी नुकसान हुआ। मेयर उमेश गाैतम भी रजिस्ट्री नहीं करा सके।

स्टांप की बिक्री नहीं होने से जमीन को बेचने और खरीदने वालों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काफी संख्या में क्रेता-विक्रेता मायूस होकर चले गए। कुछ लोगों ने हड़ताल खत्म होने का इंतजार किया लेकिन शाम तक हड़ताल जारी रही। हालांकि, विभागीय अफसर हड़ताल का असर बैनामे पर नहीं पड़ने का दावा कर रहे हैं।

स्टांप वेंडर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जयंती प्रसाद गंगवार समेत सभी स्टांप वेंडर्स की ओर से मांगों को लेकर पत्र स्टांप एवं निबंधन मंत्री रवींद्र जायसवाल को भेजा गया है, जिसमें कहा गया कि ई-स्टांप पेपर की फोटो कॉपी, स्कैनिंग करते हुए राजस्व चोरी हो रही है। उसे रोकने के लिए सुरक्षा फीचर्स लगाया जाए। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन राजस्व क्षति को राेकने में सक्षम नहीं है। वेंडर्स काे आईडी कार्ड, फिजिकल स्टांप पेपर एवं ई-स्टांप समानांतर रखा जाए। 

उन्होंने बताया कि पहले मैनुअल स्टांप बेचने की व्यवस्था थी, जिसमें एक लाख के स्टांप पर वेंडरों को एक हजार का कमीशन मिल जाता था, लेकिन बाद में सरकार ने कैसलेश स्टांप की व्यवस्था करते हुए स्टाॅक होल्डिंग कॉरपोरेशन के जिम्मे स्टांप की व्यवस्था कर दी। वेंडरों के अनुरोध पर सरकार ने कंपनी से जोड़ते हुए एक लाख के स्टांप पर 115 रुपये का कमीशन तय किया, इसमें जीएसटी से लेकर इंटनरेट समेत कई खर्च हैं, जो निकालने में है। सरकार से मांग है कि 500 रुपये स्टाॅक होल्डिंग कॉरपोरेशन और 500 रुपये वेंडराें को दिए जाएं, जिससे हम लोगों का भी खर्च निकल सके।

इटौवा गांव से निबंधन कार्यालय आया था। यहां स्टांप वेंडरों की हड़ताल की वजह से स्टांप ही नहीं मिले, इससे जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी। घंटों तक इंतजार करना पड़ा---ओमप्रकाश।

मेयर डॉ. उमेश गौतम को शाहजहांपुर रोड पर यूनिवर्सिटी के पास जमीन का बैनामा कराना था। स्टांप की बिक्री नहीं होने की वजह जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है---अनूप दीक्षित, बैनामा लेखक।

दो सौ गज के प्लाट का बैनामा कराने के लिए सुबह 10 बजे निबंधन कार्यालय आ गया था। इस इंतजार में था कि हड़ताल खत्म होने पर स्टांप मिल जाएगा, जिससे शनिवार को रजिस्ट्री करा लेंगे, लेकिन बात नहीं बनी---दीवान सिंह।

रोजाना 5 से 6 बैनामा कराता हूं। शुक्रवार को पांच लोग हमारे तख्त से लौट गए। स्टांप नहीं मिल पाने की वजह से लोगों की बेवजह भागदौड़ हुई--- मुदित स्वरूप, बैनामा लेखक।

हड़ताल से थोड़ा बहुत असर पड़ा होगा। कोई हम लोगों के पास तो नहीं आया। रजिस्ट्रियां सामान्य रूप से हुई हैं। कार्यालय के नीचे और स्टेशन रोड पर स्टाॅक होल्डिंग कॉरपोरेशन के ऑफिस में स्टांप मिलते हैं, लोगों ने वहां से खरीदे। तहसीलों में भी इसकी फ्रेंचाइजी है---रामेंद्र श्रीवास्तव, उप रजिस्ट्रार द्वितीय।

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