कटऑफ अभ्यर्थियों की संख्या को सीमित करने का एकमात्र उपाय : हाईकोर्ट
प्रयागरज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक (टीजीटी) भर्ती मामले में कहा कि अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए कट ऑफ मार्क्स ही एक ऐसा तरीका है, जिससे रिक्तियों के सापेक्ष अभ्यर्थियों की संख्या को सुनिश्चित किया जा सकता है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकलपीठ ने टीजीटी (हिंदी) में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत आवेदन करने वाली सामान्य वर्ग की अभ्यर्थी सुप्रिया सिंह बैस की याचिका को खारिज करते हुए दिया।
याची का तर्क था कि उसने टीजीटी हिंदी में सामान्य वर्ग के तहत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से आवेदन किया था। 8 अगस्त 2021 को लिखित परीक्षा हुई। काउंसलिंग में ना बुलाने पर याची ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड चयन के फैसले को अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसके जवाब में डिप्टी डायरेक्टर माध्यमिक, प्रयागराज की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि याची को निर्धारित कट ऑफ अंक से कम नंबर मिले थे, इसलिए वह चयन सूची और प्रतीक्षा सूची में स्थान नहीं बना सकी। भर्ती में न्यूनतम कटऑफ अंक 237.70 निर्धारित किया गया था। प्रतीक्षा सूची में भी अंतिम अभ्यर्थी को 225.41 अंक मिले थे, जबकि याची को 192.62 अंक ही प्राप्त हुए थे।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि कट ऑफ मार्क्स का प्रावधान न तो विज्ञापन में रखा गया था और ना ही नियम व शर्तों में ऐसा कोई प्रावधान था। इस पर कोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए कट ऑफ मार्क्स ही एकमात्र तरीका है, जिससे रिक्तियों के सापेक्ष अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या को सीमित किया जा सकता है।
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