उप्र: निजीकरण से पहले इन बातों पर भी ध्यान दें, टोरेंट ने क्या हश्र किया आगरा का
लखनऊ, अमृत विचार। प्रदेश में निजीकरण के दोनों प्रयोग (नोएडा पावर कंपनी और टोरेंट पावर आगरा) फेल हो गए हैं। टोरेंट आगरा में न तो लाइन हानियों को 15 फीसद तक ला पाया और नहीं पुराना बकाया वसूल पॉवर कार्पोरेशन को दे पाया है। वहीं दूसरी ओर नोएडा पावर कंपनी को वितरण कंपनी बताते हुए …
लखनऊ, अमृत विचार। प्रदेश में निजीकरण के दोनों प्रयोग (नोएडा पावर कंपनी और टोरेंट पावर आगरा) फेल हो गए हैं। टोरेंट आगरा में न तो लाइन हानियों को 15 फीसद तक ला पाया और नहीं पुराना बकाया वसूल पॉवर कार्पोरेशन को दे पाया है। वहीं दूसरी ओर नोएडा पावर कंपनी को वितरण कंपनी बताते हुए कहा है कि पावर कार्पोरेशन खुद ही एक कंपनी है।
वह इसकी जांच नहीं कर सकती। इसलिए इसकी जांच सरकार करे। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों निजी घराने अपनी लॉबिंग में लगे हैं। ऐसे में ये कंपनियों विभाग को न तो बेहतर राजस्व दे सकेंगी और न ही उपभोक्ताओं को सहूलियत।
बता दें कि दोनों कंपनियों के कार्यप्रणाली और गतिविधियों पर राज्य उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री से शिकायत दर्ज कराई थी। जिस पर मंत्री ने तीन सदस्ययी कमेटी की जांच बैठा दी थी। कमेटी की ओर से जांच रिपोर्ट को गुरुवार को सौंप दिया गया है। जिस पर उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन (यूपीपीसीएल) में हड़कंप मचा हुआ है।
इस रिपोर्ट में टोरेंट पावर आगरा के ऊपर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कमेटी की ओर से टोरेंट की विस्तृत जांच थर्ड पार्टी से कराने की बात कहीं गई है। बता दें कि आगरा के निजीकरण का मुख्य कारण अधिक एग्रीग्रेटे टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉस (एटीएंडसी हानियां) थीं। जिसे अनुबंध की शर्तों के अनुसार 31 मार्च 2017 तक टोरेंट पावर को 15 प्रतिशत पर लाना था।
लेकिन टोरेंट नहीं कर सकी। इसके साथ ही कंपनी पुराना बकाया भी नहीं वसूल सकी। इसके अलावा नोएडा पावर कंपनी पर कमेटी ने कहा कि पावर कार्पोरेशन खुद ही एक कंपनी है। वह इसकी जांच नहीं कर सकती। इसकी जांच सरकार किसी एजेंसी से कराए। कुल मिलाकर सरकार को नोएडा पावर कंपनी के खिलाफ जांच बैठानी होगी।
बता दें कि उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ने 13 जनवरी 2020 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से मिलकर टोरेंट पावर कंपनी व नोएडा पावर कंपनी पर गंभीर आरोप लगाया था। इस दौरान एक प्रस्ताव सौंप कर जांच कराने की मांग की थी। इस मांग में कहा गया था कि सरकार को दोनों निजी घरानों की जांच कराने चाहिए।
इस जांच में यह पता लगाया जाए कि इससे उपभोक्ताओं का क्या फायदा हुआ। और अनुबंध की शर्तों का पालन हुआ या नहीं। वहीं ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने निदेशक वाणिज्य पावर कार्पोरेशन की अध्यक्षता में एक तीन सदसीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों निजी घराने अपनी लॉबिंग में लगे हैं।
वहीं दूसरी ओर से अवधेश कुमार वर्मा ने कहा अब सबसे बड़ा सवाल यह है की टोरेंट पावर आगरा जिसके संबंध में जांच कमेटी ने बड़ा खुलासा किया है और उपभोक्ता परिषद के उठाए गए मुद्दे सच साबित हुए हैं। जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि टोरेंट पावर कंपनी को आगरा में अप्रैल 2010 तक जो उपभोक्ताओ के ऊपर पुराना बकाया रुपया 1677 करोड़ था और उसे वसूल कर बिजली कंपनी दक्षिणांचल को वापस करना था। उसमे से मात्र 52 करोड़ 44 लाख वापस किया।
वहीं अब कुल बकाया बढ़कर जून 2020 तक 2221 करोड़ हो गया है। जो एग्रीग्रेटे टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉस (एटीएंडसी हानिया) 31 मार्च 2017 तक 15 प्रतिशत पर लाना था। वह 31 मार्च 2017 को 27.21 प्रतिशत थी और 31 मार्च 2019 को वह 17.06 प्रतिशत पर पहुंची। जांच रिपोर्ट में कमेटी ने टोरेंट पावर द्वारा वसूल किए गये रेगुलेटरी सरचार्ज की भी छानबीन की बात कही गई है।
